ओमान में फंसी सिमडेगा की बेटी की सकुशल वापसी! मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर रंग लाई राज्य सरकार की कोशिशें
रांची। विदेश में बेहतर रोजगार का सपना लेकर गई झारखंड के सिमडेगा जिले की बेटी प्रीति कुजूर के लिए आखिरकार राहत की घड़ी आ गई है। ओमान में बंधक जैसी स्थितियों और शोषण का शिकार बनी प्रीति की सुरक्षित व सकुशल घर वापसी हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कड़े रुख और त्वरित निर्देशों के बाद श्रम विभाग के 'राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष' तथा मस्कट स्थित भारतीय दूतावास के साझा प्रयासों से यह संभव हो सका। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अनुसार, प्रीति 1 अगस्त को ओमान से भारत के लिए रवाना हो चुकी हैं और 2 अगस्त 2026 को अपने गृह जिले सिमडेगा पहुँच रही हैं।
झारखंड सरकार के प्रयासों और भारतीय दूतावास के सहयोग से ओमान में फंसी सिमडेगा की प्रवासी श्रमिक प्रीति कुजूर की सुरक्षित घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारतीय दूतावास, मस्कट और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया, जिसके बाद प्रीति 1 अगस्त को भारत के लिए रवाना हो गईं। उनके 2 अगस्त को अपने गृह जिले सिमडेगा पहुंचने की संभावना जताई गई है। यह मामला सोशल मीडिया के जरिए सामने आया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष सक्रिय हुआ और भारतीय दूतावास के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। जानकारी के अनुसार, सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड की रहने वाली प्रीति कुजूर को मार्च 2026 में एक एजेंट ने दुबई में बेहतर वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजा था। परिवार को बताया गया था कि उन्हें हर महीने 45 से 50 हजार रुपये तक का वेतन मिलेगा। लेकिन दुबई की जगह उन्हें ओमान भेज दिया गया, जहां तय वेतन से काफी कम राशि पर काम कराया गया। इतना ही नहीं, जब प्रीति ने भारत लौटने की इच्छा जताई तो कंपनी की ओर से भारी रकम की मांग की गई। प्रीति की बहन रंतु कुजूर ने 19 जून को सोशल मीडिया के माध्यम से बहन की घर वापसी के लिए मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंट ने नौकरी और वेतन को लेकर गलत जानकारी देकर परिवार को गुमराह किया। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी मालिक को 1.92 लाख रुपये देने के बावजूद प्रीति को वापस नहीं भेजा जा रहा था। मामले के सामने आने के बाद राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने भारतीय दूतावास, मस्कट के जरिए कंपनी प्रबंधन से बातचीत शुरू की। कंपनी मालिक ने दो वर्ष का अनुबंध पूरा होने से पहले प्रीति को छोड़ने के लिए 950 ओमानी रियाल की मांग रखी। लगातार बातचीत और सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप के बाद यह राशि घटाकर 600 ओमानी रियाल पर सहमति बनी। इसके बाद कंपनी ने प्रीति का पासपोर्ट और अन्य आवश्यक दस्तावेज वापस कर दिए, जिससे उनकी स्वदेश वापसी का रास्ता खुल गया। झारखंड सरकार ने इस पूरी कार्रवाई को प्रवासी श्रमिकों के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सरकार का कहना है कि देश और विदेश में काम कर रहे झारखंड के श्रमिकों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है और आपात स्थिति में प्रवासी श्रमिकों को त्वरित सहायता उपलब्ध करा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर विदेशों में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी और मानव तस्करी जैसे मामलों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश जाने से पहले एजेंटों और कंपनियों की पूरी जांच-पड़ताल करना तथा केवल अधिकृत माध्यमों से ही रोजगार स्वीकार करना बेहद जरूरी है। प्रीति कुजूर की सुरक्षित वापसी न केवल उनके परिवार के लिए राहत की खबर है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समय पर सरकारी हस्तक्षेप और भारतीय दूतावास के समन्वित प्रयास से विदेशों में फंसे प्रवासी श्रमिकों को राहत पहुंचाई जा सकती है। अब पूरे सिमडेगा जिले को अपनी बेटी की घर वापसी का इंतजार है, जबकि यह मामला अन्य प्रवासी श्रमिकों के लिए भी सतर्क रहने और अधिकृत माध्यमों से ही विदेश जाने का महत्वपूर्ण संदेश छोड़ गया है।