सऊदी अरब ब्रेकिंग:क्राउन प्रिंस MBS बने देश के नए प्रधानमंत्री!रूढ़िवादी देश मे प्रिंस क्राउन ने महिलाओं को दी आज़ादी, आतंकवाद और चरमपंथी विचारधारा के अपराधों के लिए तय की फांसी की सजा!जानिए और क्या बड़े बदलाव कर चुके है युवाओं के लोकप्रिय शासक MBS
India,28.9.2022
सऊदी अरब की राजनीति में बड़ा परिवर्तन हुआ है। सऊदी अरब के राजा किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज ने बीते रोज शाही फरमान जारी करते हुए क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को देश का पीएम और अपने दूसरे बेटे प्रिंस खालिद को रक्षा मंत्री बनाया है।शाही फरमान जारी होने के बाद क्राउन प्रिंस को बधाई देने वालो का तांता लग गया है। शाही फरमान के मुताबिक विदेश मंत्री की ज़िम्मेदारी अब प्रिंस फैजल बिन फरहान अल सऊद ही रहेंगे।
आपको बता दें क्राउन प्रिंस दुनियाभर में MBS के नाम से मशहूर है,अब तक क्राउन प्रिंस सऊदी अरब के रक्षा मंत्री थे,सऊदी अरब के लिए शासक के रूप के प्रिंस एमबीएस ही पहली पसंद रहे।सरकारी न्यूज़ एजेंसी SPA के मुताबिक शाही हुक्मनामे में किंग सलमान ने कई पदों की घोषणा की है।
सऊदी के नए किंग मोहम्मद बिन सलमान क्राउन प्रिंस एमबीएस का जन्म 31 अगस्त 1985 को हुआ था।क्राउन प्रिंस किंग सलमान के सातवें बेटे है। वह साल 2030 तक सऊदी अरब की अर्थव्यस्था को बदलना और तेल पर उसकी निर्भरता को खत्म करना चाहते हैं। वहीं एमबीएस को साल 2018 में हुई पत्रकार खशोगी की हत्या से जोड़कर भी देखा जाता है।जब किंग सलमान से उनके इस फैसले के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि एमबीएस उनके सभी बेटों में ऐसे अकेले हैं, जो "निर्दयी" हैं, इसलिए वह शक्ति के सभी केंद्रों और एक बड़े शाही परिवार के साथ देश को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त हैं।
एमबीएस को क्राउन प्रिंस बनाया जाना सभी के लिए काफी हैरान कर देने वाला मामला था। क्योंकि न तो उनके पास सैन्य ट्रेनिंग थी, न ही उन्होंने विदेश में पढ़ाई की, जबकि मंत्री पदों पर बैठे उनके भाइयों ने विदेश से पढ़ाई की है। एमबीएस ने किंग साऊद यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। वहीं उनके एक भाई ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है और एक अन्य सऊदी वायु सेना का पायलट और एस्ट्रोनॉट है। हालांकि पद संभालने के बाद से वह क्रूर भी बने रहे।
एमबीएस ने शाही राजघराने और अन्य अमीरों को भ्रष्टाचार के आरोपों में, या चुप कराने के लिए कैद तक किया है। जिसके चलते परिवार के भीतर उनके खिलाफ नाराजगी भी देखी गई। उन्हीं को पत्रकार जमाल खशोगी की मौत का जिम्मेदार बताया जाता है। खशोगी वाशिंगटन पोस्ट के लिए लेख लिखते थे और सऊदी अरब शासन के आलोचक थे। ऐसा कहा गया कि उनकी हत्या का आदेश मोहम्मद बिन सलमान ने ही दिया था। खशोगी की तुर्की के इस्तांबुल में सऊदी अरब के दूतावास के भीतर हत्या कर दी गई थी। ऐसा कहा जाता है कि उनके शव का भी यहीं पर निपटारा किया गया। वह यहां दस्तावेज से जुड़े काम के लिए आए थे। ये खबर भी आई कि क्राउन प्रिंस ने सिविल सोसाइटी के सदस्यों पर जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस से निगरानी कराने का आदेश दिया था।
रूढ़िवादी देश में प्रिंस सलमान ने आर्थिक विकास के लिए काम करना शुरू किया और महिलाओं को इसी के तहत आजादी दी गई। उन्होंने शाही परिवार, व्यवसायी और मौलवियों के साथ इस तरह से पावर को बैलेंस किया, कि वह देश के युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गए। उन्होंने अपने 'विजन 2030 प्रोग्राम' के तहत देश को एक नया भविष्य देने का वादा किया। तेल पर आधारित देश की अर्थव्यवस्था को अब शिक्षा और रोजगार के जरिए अधिक मजबूत करने की वकालत की। उन्होंने रेगिस्तान में एक नई 500 बिलियन डॉलर की हाई-टेक सिटी परियोजना बनाई, जिसे 'नियोम' कहा जाता है।
सऊदी में वो बदलाव देखे गए, जिनकी कभी किसी ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी। अब महिलाओं को पूरी तरह से पर्दा नहीं करना पड़ता या गार्जियनशिप नियमों (पिता या पति से हर बात की अनुमति लेना) का पालन नहीं करना पड़ता, वह कार चला सकती हैं। पुरुष और महिलाएं मुत्तवीन (धार्मिक पुलिस) के खौफ के बिना घूम फिर सकते हैं, सिनेमा हॉल जा सकते हैं, या रैप और हिप-हॉप कॉन्सर्ट में शामिल हो सकते हैं। 9/11 के बाद से अपने पिता और पिछले शासकों की तरह, एमबीएस ने भी देश की छवि को इस्लामी चरमपंथी समूहों को वित्त पोषण और बढ़ावा देने से एकदम अलग करने की कोशिश की है।
उन्होंने इस साल की शुरुआत में सऊदी अरब की सबसे बड़ी मौत की सजाओं का निरीक्षण किया, जिसमें 81 लोगों को "आतंकवाद और चरमपंथी विचारधारा" के अपराधों के लिए फांसी दी गई थी। उनपर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी लगे। उनके शासन से असंतुष्ट लेखक रैफ बदावी और महिला कार्यकर्ता लौजैन अलहथलौल की कैद और कथित यातना के चलते उनकी खूब आलोचना होती है। इन लोगों को बेशक अब जेल से रिहा कर दिया गया है लेकिन इनपर यात्रा प्रतिबंध लगे हुए हैं। उनके आलचकों को डर है कि जब 40 साल से कम उम्र में महज क्राउन प्रिंस के पद पर बैठकर एमबीएस इतना कुछ कर रहे हैं और उनके पास इतनी पावर है, तो उनके किंग बनने पर वह क्या कुछ करेंगे
व्यवसाय के मामले में एमबीएस को अपने देश के लोगों को यह समझाने की जरूरत होगी कि निवेश के लिए सऊदी अरब के दरवाजे खोलने से सख्त नागरिकता कानून कमजोर नहीं होंगे और प्रवासियों को नियोम (हाई-टेक सिटी) की तरफ आकर्षित करने की उनकी योजना देश के खजाने को खाली नहीं करेगी। 1800 के दशक की शुरुआत में फ्रांसीसी राजनेता और विचारक एलेक्सिस डी टोकेविल ने कहा था, 'अनुभव बताता है कि एक खराब सरकार के लिए सबसे खतरनाक समय आमतौर पर तब होता है, जब वह सुधार करना शुरू करती है।' और यही बात आने वाले वक्त में क्राउन प्रिंस के लिए वास्तविकता साबित हो सकती है। उन्हें तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।