आदि कैलाश में सुरक्षा चूक: बिना परमिट प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंचे पर्यटक, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप
पिथौरागढ़। भारत-चीन सीमा के निकट स्थित सामरिक रूप से संवेदनशील आदि कैलाश क्षेत्र में बड़ी सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। कुछ पर्यटकों द्वारा बिना वैध 'इनर लाइन परमिट' के आदि कैलाश पहुंचने और वहां की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए धारचूला के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) ने आईटीबीपी (ITBP) को गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
आदि कैलाश और ओम पर्वत चीन सीमा के बेहद करीब स्थित हैं। सुरक्षा कारणों से छियालेख को इनर लाइन घोषित किया गया है, जहां से आगे जाने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी परमिट अनिवार्य है। छियालेख में आईटीबीपी का मुख्य चेकपोस्ट है, जो हर आने-जाने वाले व्यक्ति के दस्तावेजों की गहनता से जांच करता है। ऐसे में बिना परमिट पर्यटकों का वहां पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो 12 अप्रैल का बताया जा रहा है, जबकि इस वर्ष की आधिकारिक यात्रा 1 मई से शुरू होनी है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ा ऐतराज जताया है। स्थानीय टूर ऑपरेटर प्रदीप ह्याकी ने कहा कि यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। यदि कुछ टूर ऑपरेटर निजी मुनाफे के लिए नियमों को दरकिनार कर पर्यटकों को वहां ले जा रहे हैं, तो यह राष्ट्र की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार टूर ऑपरेटरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले पर संज्ञान लेते हुए धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि आईटीबीपी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे उस समय तैनात कर्मियों और दस्तावेजों की जांच करें। प्रशासन ने उन पर्यटकों का पूरा विवरण पांच दिन के भीतर तलब किया है। एसडीएम ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में स्थित आदि कैलाश को 'छोटा कैलाश' भी कहा जाता है और इसे पंच कैलाशों में से एक माना जाता है। सड़क मार्ग बनने के बाद अब श्रद्धालु धारचूला से जोलिंगकोंग तक वाहनों से पहुंच सकते हैं। हालांकि, चीन सीमा से सटा होने के कारण यहां की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट, मेडिकल फिटनेस और स्थानीय प्रशासन की अनुमति अनिवार्य होती है। 1 मई से शुरू होने वाली आधिकारिक यात्रा के लिए प्रशासन पहले से ही तैयारियों में जुटा है।