अयोध्या मेडिकल कॉलेज में सनसनी: पैरामेडिकल छात्र के पास मिली बम बनाने की पर्ची,मोबाइल में मिलीं धमाके की रील्स,एटीएस-आईबी समेत कई एजेंसियां जांच में जुटीं
उत्तरप्रदेश के अयोध्या स्थित राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक पैरामेडिकल छात्र के पास बम बनाने की प्रक्रिया से संबंधित हस्तलिखित पर्ची मिलने की सूचना सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने छात्र को हिरासत में लेकर उसका मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त कर लिया है, जबकि उसके किराये के कमरे को भी सील कर दिया गया है। घटना के बाद एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस), इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), मिलिट्री इंटेलिजेंस और स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) समेत कई सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गई हैं।
जानकारी के अनुसार, बलरामपुर जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र के पुरैनिया तालाब निवासी 26 वर्षीय छात्र ने अक्टूबर 2025 में मेडिकल कॉलेज में एक्सरे टेक्नीशियन कोर्स में प्रवेश लिया था। उसकी ड्यूटी रात के समय कॉलेज की लैब में लगाई गई थी। शनिवार सुबह एक्सरे कक्ष से एक हस्तलिखित पर्ची बरामद हुई, जिसमें कथित तौर पर बम बनाने की प्रक्रिया, उसके आकार और इस्तेमाल होने वाले रसायनों का उल्लेख था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने कॉलेज परिसर के पास स्थित किराये के कमरे से छात्र को हिरासत में लिया। शुरुआती जांच के दौरान उसका मोबाइल फोन और लैपटॉप भी जब्त कर लिए गए। सूत्रों के अनुसार, छात्र के मोबाइल में विस्फोट और बम बनाने से संबंधित सोशल मीडिया रील्स तथा इंटरनेट सर्च हिस्ट्री में भी इसी प्रकार की सामग्री मिलने की बात सामने आई है। हालांकि इन दावों की पुष्टि फोरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगी। सुरक्षा एजेंसियां अब छात्र के डिजिटल उपकरणों की विस्तृत फोरेंसिक जांच करा रही हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संदिग्ध सामग्री केवल इंटरनेट से खोजी गई थी या इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क, कट्टरपंथी प्रचार या किसी अन्य उद्देश्य का संबंध है। छात्र के सोशल मीडिया अकाउंट, चैट, ऑनलाइन संपर्क और डिजिटल गतिविधियों की भी गहन पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं छात्र सोशल मीडिया पर सक्रिय किसी चरमपंथी प्रचार से प्रभावित तो नहीं हुआ। हालांकि, अभी तक किसी आतंकी संगठन या संदिग्ध नेटवर्क से उसके सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी डिजिटल एवं तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा। पूछताछ के दौरान छात्र ने दावा किया कि वह अपने दो-तीन साथियों के साथ एक फिल्म देख रहा था, जिसमें बम बनाने की प्रक्रिया दिखाई गई थी। उसके अनुसार, उसने फिल्म में दिखाई गई जानकारी को केवल कागज पर नोट कर लिया था। पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या वास्तव में संबंधित जानकारी किसी फिल्म से लिखी गई थी या वह पहले से इस विषय में जानकारी जुटा रहा था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि फिलहाल छात्र से पूछताछ जारी है और उसके डिजिटल उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में किसी संदिग्ध संगठन से जुड़े होने के ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं, लेकिन जांच पूरी होने तक सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जाएगी। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां छात्र के संपर्क में रहे लोगों, उसकी गतिविधियों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला जांच के प्रारंभिक चरण में है और पुलिस ने लोगों से अपुष्ट सूचनाओं या अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।