उत्तराखंड विधानसभा में 'शक्ति' गर्जना: सीएम धामी ने विपक्ष को घेरा, कहा-सीता माता के अपमान से हुआ था रावण का अंत"
उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र आज राजनीति के चरम और तीखे प्रहारों का गवाह बना। 'नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम' पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पर अब तक का सबसे आक्रामक हमला बोला। मुख्यमंत्री ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के असफल होने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जिस प्रकार रावण का अंत माता सीता के अपमान से हुआ था, उसी प्रकार मातृशक्ति के अधिकारों को रोकने वालों का राजनीतिक पतन भी निश्चित है।
सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया, "अगर उत्तराखंड में लोकसभा सीटें 5 से बढ़कर 8 और विधानसभा सीटें 70 से बढ़कर 105 हो जाती हैं, तो विपक्ष को परेशानी क्यों है? बढ़ी हुई सीटें आखिर महिलाओं को ही मिलनी थीं, फिर इसे रोकने का काम क्यों किया गया?" उन्होंने नेहरू और गांधी परिवारों के कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि उनके समय कैबिनेट में मुश्किल से एक महिला होती थी, जबकि मोदी मंत्रिमंडल में 7 महिला मंत्री देश चला रही हैं। मुख्यमंत्री ने सरकार की योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना ने करोड़ों माताओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति दी है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य में सिलिंडर की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा को बदनाम करने की कोशिशों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, "चारधाम हमारी आस्था और लाइफलाइन है। कुछ लोग भीड़ का हवाला देकर और सोशल मीडिया पर रील बनाकर यात्रा की छवि खराब कर रहे हैं। आपको मेरा विरोध करना है तो करें, लेकिन उत्तराखंड की संस्कृति और चारधाम को बदनाम करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएम धामी ने कहा कि कांग्रेस को डर था कि अगर आरक्षण बिल पास हो गया, तो इसका पूरा श्रेय मोदी जी को मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही साफ कर दिया था कि किसी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि सुकन्या समृद्धि योजना में 8.2% ब्याज और संस्थागत प्रसव का 97% तक पहुंचना सरकार की नीयत को दर्शाता है, जबकि विपक्ष केवल 'वोट बैंक' की राजनीति में उलझा है। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्षी विधायकों ने भारी हंगामा और नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल विज्ञापनों और आयोजनों में व्यस्त है, जबकि धरातल पर महिलाओं की स्थिति और सुरक्षा के मुद्दे गौण हैं। हंगामे के बीच भी मुख्यमंत्री ने अपना संबोधन जारी रखा और साफ किया कि देवभूमि की मातृशक्ति अपने हक को रोकने वालों को कभी माफ नहीं करेगी।