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शुद्धिकरण विवाद पर उत्तराखंड में आर-पार: 7 सितंबर को सड़क पर कांग्रेस और भाजपा की सीधी जंग

editor
  • Tapas Vishwas
  • September 04, 2026 11:09 AM
Showdown in Uttarakhand over purification controversy: Congress and BJP set for a direct face-off on the streets on September 7.

देहरादून। हल्द्वानी में बीते 8 अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद 11 अगस्त को हुए शुद्धिकरण का विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। आगामी चुनावों से ठीक पहले यह मुद्दा न केवल राष्ट्रीय स्तर पर गूंज रहा है, बल्कि उत्तराखंड में इसने एक बड़े राज्य स्तरीय राजनीतिक आंदोलन का रूप ले लिया है। आगामी 7 सितंबर को प्रदेश की सड़कों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सीधा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलेगा। एक तरफ जहां प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपनी मांगों को लेकर देहरादून में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का ऐलान किया है, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने उसी दिन राज्य के सभी 19 संगठनात्मक जिला मुख्यालयों पर 'सामाजिक सौहार्द संकल्प धरना' आयोजित करने का फैसला लिया है।

कांग्रेस के कार्यक्रम के मुताबिक, सात सितंबर की सुबह दस बजे पार्टी कार्यकर्ता देहरादून के परेड ग्राउंड में जुटेंगे। इसके बाद बड़ी रैली के रूप में मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार आंदोलन से पहले उसकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो मुख्यमंत्री आवास कूच के कार्यक्रम पर पुनर्विचार किया जा सकता है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में भाजपा की ओर से कांग्रेस की मांगों को लेकर किसी सकारात्मक निर्णय के संकेत नहीं दिए गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार के सामने मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं। पहली मांग हल्द्वानी में शुद्धिकरण कराने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की है। कांग्रेस का आरोप है कि सार्वजनिक रूप से इस तरह का कदम कानून और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। दूसरी मांग इस पूरे मामले में भाजपा नेताओं की भूमिका और कथित समर्थन की जांच से जुड़ी है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट द्वारा शुद्धिकरण को उचित ठहराए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। गोदियाल का कहना है कि यदि शुद्धिकरण कराने वालों पर कार्रवाई नहीं होती तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी। कांग्रेस की तीसरी प्रमुख मांग कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की है। गणेश गोदियाल ने कहा कि इस घटनाक्रम में राहुल गांधी शिकायतकर्ता हैं, इसके बावजूद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। कांग्रेस इसे गलत बताते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग कर रही है। गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस वैचारिक लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका कहना है कि यदि सरकार मांगें नहीं मानती है तो पार्टी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी और सरकार को मांगें मानने के लिए मजबूर किया जाएगा। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि सात सितंबर का सीएम आवास कूच केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि शुद्धिकरण विवाद के खिलाफ उसके बड़े राजनीतिक अभियान की शुरुआत हो सकता है। हालांकि कांग्रेस का यह भी कहना है कि सरकार यदि उसकी तीनों मांगों को मान लेती है तो मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान शुद्धिकरण का मुद्दा नहीं उठाया जाएगा। ऐसी स्थिति में पार्टी अन्य जनमुद्दों को लेकर सरकार को घेर सकती है। कांग्रेस के आंदोलन के जवाब में भाजपा ने भी सात सितंबर को प्रदेशभर में कार्यक्रम की रणनीति तैयार कर ली है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के अनुसार, पार्टी के अनुसूचित मोर्चे के कार्यकर्ता प्रदेश के सभी 19 संगठनात्मक जिलों में ‘सामाजिक सौहार्द संकल्प धरना’ देंगे। भाजपा का कहना है कि हल्द्वानी की घटना के बाद कांग्रेस ने ऐसा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की, जिससे समाज में विद्वेष पैदा हो। महेंद्र भट्ट ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रही है। भाजपा का धरना सामाजिक एकता और सौहार्द बनाए रखने का संदेश देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाएगा। शुद्धिकरण विवाद अब हल्द्वानी तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे कानून, संविधान और राजनीतिक जवाबदेही से जोड़कर सरकार को घेर रही है, जबकि भाजपा इसे सामाजिक सौहार्द और सामाजिक विभाजन के मुद्दे से जोड़ रही है। दोनों दलों ने सात सितंबर के लिए अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है। एक ओर देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगे, वहीं दूसरी ओर भाजपा के कार्यकर्ता 19 जिला मुख्यालयों पर धरना देकर अपना पक्ष रखेंगे। ऐसे में सात सितंबर उत्तराखंड की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन बनने जा रहा है। चुनावी माहौल के बीच इस विवाद ने दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक दूरी और टकराव को और बढ़ा दिया है।


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