गैस के दाम पर आर-पार: कांग्रेस ने पूछा- कंपनियां कमा रहीं बंपर मुनाफा तो जनता पर बोझ क्यों? सरकार ने दिया वैश्विक संकट का हवाला
नई दिल्ली। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में 29 रुपये की ताजा बढ़ोतरी के बाद देश का सियासी पारा गरमा गया है। इस मूल्यवृद्धि के बाद राजधानी दिल्ली में घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 942 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। दामों में हुए इस इजाफे को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस ने जहां सरकारी तेल कंपनियों के मुनाफे को लेकर सरकार को घेरा है, वहीं सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच एक मजबूरी भरा कदम बताया है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गैस की कीमतें बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां हजारों करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मुनाफा कूट रही हैं, तो फिर आम जनता पर महंगाई का यह अतिरिक्त बोझ क्यों लादा जा रहा है? कांग्रेस का आरोप है कि सरकार एक तरफ कंपनियों को मालामाल कर रही है और दूसरी तरफ आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ रही है। विपक्ष के हमलों पर पलटवार करते हुए केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों का हवाला दिया है। सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया और खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी भारी सैन्य व भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी की लागत बहुत बढ़ गई है। इसके बावजूद, भारत सरकार और तेल कंपनियां मिलकर इस बढ़े हुए खर्च का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही हैं। सरकार का दावा है कि इन विपरीत परिस्थितियों के बाद भी भारत में घरेलू गैस दुनिया के कई विकसित और पड़ोसी देशों की तुलना में बेहद सस्ती है। सरकार ने रेखांकित किया कि आम उपभोक्ताओं को जहां राहत दी जा रही है, वहीं 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' के लाभार्थियों को यह सिलिंडर प्रभावी तौर पर केवल 642 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि गरीब वर्ग पर इसका असर न पड़े। फिलहाल, इस बढ़ोतरी को लेकर जनता के बीच बहस छिड़ गई है।