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उत्तराखंड में बिजली संकट की आहट! तीन साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने की कगार पर मांग,यूपीसीएल पर आया भारी दबाव

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 22, 2026 06:05 AM
Signs of an Impending Power Crisis in Uttarakhand! Demand on the Verge of Breaking a Three-Year-Old Record, Placing Immense Pressure on UPCL.

देहरादून। उत्तराखंड में जैसे-जैसे सूरज की तपिश और गर्मी का पारा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे प्रदेश में बिजली की मांग ने ऊर्जा महकमे की चिंताएं बढ़ा दी हैं। देवभूमि में बिजली की खपत इस समय अपने तीन साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने के बेहद करीब पहुंच चुकी है। सालाना गर्मी के लोड के साथ-साथ इस बार घरों में इंडक्शन चूल्हों के बढ़ते इस्तेमाल ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की आपूर्ति प्रणाली पर करीब 100 मेगावाट का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।

बिजली की मांग में आया उछाल आंकड़ों से साफ जाहिर होता है। चालू महीने की पहली तारीख यानी 1 मई को जहां प्रदेश में बिजली की मांग 4 करोड़ यूनिट (40 मिलियन यूनिट) दर्ज की गई थी, वहीं यह अब बढ़कर करीब 6 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है। गौरतलब है कि तीन साल पहले प्रदेश में बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर यानी 6.6 करोड़ यूनिट तक पहुंची थी। यूपीसीएल प्रबंधन का मानना है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस साल यह पुराना रिकॉर्ड भी टूट सकता है, जिसके लिए अभी से पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इस बढ़ते लोड और चुनौती के बीच यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक जीएस बुदियाल ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत की खबर दी है। उन्होंने बताया कि, "फिलहाल राज्य में मांग के अनुरूप बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है और कहीं भी घोषित या अघोषित बिजली कटौती नहीं की जा रही है।" उन्होंने आगे जोड़ा कि निगम ने संभावित मांग को देखते हुए अप्रैल महीने में ही अपनी तैयारियां पूरी कर ली थीं। इसके अलावा, काशीपुर स्थित गैस आधारित ऊर्जा परियोजना 'गामा' से भी जल्द ही करीब 75 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलनी शुरू हो जाएगी। यदि इसके बाद भी मांग बढ़ती है, तो बाजार (ओपन मार्केट) से बिजली खरीदकर आपूर्ति सुचारू रखी जाएगी। आपूर्ति व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए यूपीसीएल का शीर्ष प्रबंधन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। निदेशक परिचालन एमआर आर्य अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर राज्य की बिजली आपूर्ति का लाइव प्रसारण चलाकर पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। निगम के इस हाई-टेक सॉफ्टवेयर में केंद्रीय पूल, राज्य पूल और सोलर एनर्जी से मिलने वाली बिजली की सटीक जानकारी हर 15 मिनट में अपडेट होती है, जिससे मांग और आपूर्ति के अंतर को तुरंत नियंत्रित किया जा रहा है।


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