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उत्तराखंड में एसआईआर अभियान: पिथौरागढ़ 81% के साथ 'टॉप' पर, राजधानी देहरादून की रफ्तार सबसे सुस्त

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 12, 2026 01:06 PM
SIR campaign in Uttarakhand: Pithoragarh tops the list with 81%, while capital Dehradun shows the slowest pace.

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी चुनावों को लेकर चल रहे बेहद महत्वपूर्ण 'एसआईआर' अभियान की प्रगति रिपोर्ट सामने आ गई है। राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 79,60,762 मतदाताओं में से अब तक 41,26,739 (51.84 प्रतिशत) मतदाताओं को गणना फॉर्म बांटे जा चुके हैं। निर्वाचन कार्यालय ने आगामी 18 जून तक शत-प्रतिशत फॉर्म वितरित करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, मैदानी और कुछ पहाड़ी जिलों में सुस्त रफ्तार ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद अब लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाइयों का दौर भी शुरू हो गया है।

उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की रफ्तार को लेकर निर्वाचन विभाग की चिंता बढ़ गई है। राज्यभर में 8 जून से शुरू हुए इस अभियान के पांच दिन बाद भी केवल 51.84 प्रतिशत मतदाताओं तक ही गणना फॉर्म पहुंच पाए हैं। सबसे बड़ी चिंता राजधानी देहरादून को लेकर है, जहां एसआईआर अभियान की प्रगति राज्य में सबसे धीमी दर्ज की गई है। वहीं सीमांत जनपद पिथौरागढ़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में कुल 79 लाख 60 हजार 762 मतदाता हैं। इनमें से 12 जून की शाम चार बजे तक 41 लाख 26 हजार 739 मतदाताओं को गणना फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं। निर्वाचन विभाग ने 18 जून तक सभी मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन मौजूदा प्रगति को देखते हुए यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।

प्रदेश में एसआईआर अभियान के दौरान पिथौरागढ़ जिला सबसे आगे चल रहा है। यहां 81.52 प्रतिशत मतदाताओं तक गणना फॉर्म पहुंच चुका है। इसके बाद चंपावत 72.75 प्रतिशत और टिहरी गढ़वाल 67.65 प्रतिशत के साथ बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल हैं। दूसरी ओर देहरादून, उधमसिंह नगर, चमोली, रुद्रप्रयाग और नैनीताल जैसे जिले अभी भी 50 प्रतिशत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं। राजधानी देहरादून की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक मानी जा रही है। यहां केवल 39.18 प्रतिशत मतदाताओं को ही गणना फॉर्म वितरित किए गए हैं, जो राज्य के औसत से काफी कम है। उधमसिंह नगर में 44.69 प्रतिशत, चमोली में 43.97 प्रतिशत, रुद्रप्रयाग में 47.07 प्रतिशत और नैनीताल में 49.85 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि बीएलओ लगातार घर-घर जाकर गणना पत्र वितरित कर रहे हैं। साथ ही फॉर्म प्राप्त कर उन्हें डिजिटाइज भी किया जा रहा है। बीएलओ ऐप के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है। जिन जिलों में प्रगति धीमी है, वहां विशेष मॉनिटरिंग की जा रही है और नेटवर्क संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए तकनीकी कर्मियों की भी तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि मैदानी जिलों में आबादी का घनत्व अधिक होने के कारण प्रत्येक बीएलओ को अधिक संख्या में मतदाताओं तक पहुंचना पड़ता है। यही वजह है कि देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंह नगर जैसे जिलों में प्रगति अपेक्षाकृत धीमी है। इसके बावजूद विभाग का प्रयास है कि 18 जून तक शत-प्रतिशत मतदाताओं तक गणना फॉर्म पहुंचाकर एसआईआर अभियान को सफल बनाया जाए। निर्वाचन विभाग अब कम प्रगति वाले जिलों पर विशेष फोकस कर रहा है। आने वाले दिनों में अभियान की रफ्तार बढ़ाने के लिए अतिरिक्त संसाधन और निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल किया जा सके।


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