बिहार में सॉल्वर गैंग की महासाजिश नाकाम: पुलिस रेडियो ऑपरेटर परीक्षा में फर्जीवाड़े का भंडाफोड़,15 आरोपी गिरफ्तार,भारी मात्रा में दस्तावेज जब्त
खगड़िया। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को तार-तार करने वाले एक और बड़े 'सॉल्वर गैंग' का पुलिस ने समय रहते सनसनीखेज खुलासा किया है। बिहार पुलिस की रेडियो ऑपरेटर प्रतियोगिता परीक्षा में अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलकर उन्हें अवैध तरीके से पास कराने की एक बड़ी साजिश रची जा रही थी, जिसे खगड़िया पुलिस की मुस्तैदी ने पूरी तरह नाकाम कर दिया। पुलिस की विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस संगठित गिरोह के कुल 15 आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। खगड़िया थाना में कांड संख्या 126/26 के तहत मामला दर्ज कर पुलिस ने इस रैकेट के वित्तीय नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है।
मामले का खुलासा करते हुए खगड़िया के पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने बताया कि जिला पुलिस की डीआईयू शाखा को एक पुख्ता खुफिया इनपुट मिला था। सूचना थी कि कुछ शातिर अपराधी रेडियो ऑपरेटर परीक्षा में बड़े पैमाने पर कदाचार (फर्जीवाड़ा) कराने और अभ्यर्थियों से पैसा ऐंठने की फिराक में हैं। इस सूचना की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी के निर्देश पर सदर-1 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और साइबर डीएसपी के नेतृत्व में एक हाईटेक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम ने जिले के अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की और परीक्षा में सेंध लगाने की तैयारी कर रहे 15 संदिग्धों को दबोच लिया। पुलिस की इस सर्जिकल स्ट्राइक में आरोपियों के पास से जो सामान बरामद हुआ है, वह उनके बड़े नेटवर्क की गवाही दे रहा है। पुलिस ने इनके कब्जे से 9 एक्टिव मोबाइल फोन, 7 हस्ताक्षरित बैंक चेक, 9 एटीएम कार्ड, भारी मात्रा में अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और पहचान दस्तावेज [Omitted] बरामद किए हैं। इसके अलावा गिरोह द्वारा इस्तेमाल की जा रही दो चमचमाती लग्जरी चारपहिया वाहन और एक मोटरसाइकिल को भी जब्त किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में भोजपुर, खगड़िया, पटना, वैशाली, नवादा और अरवल जिलों के शातिर दिमाग युवक और कुछ अभ्यर्थी शामिल हैं। इस सफल और समन्वित कार्रवाई में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मुकुल रंजन, साइबर डीएसपी निशांत गौरव और खगड़िया थानाध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता सहित पूरी टीम शामिल रही। एसपी भानु प्रताप सिंह ने साफ किया है कि गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस लाइंस में गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि गिरोह के मुख्य सरगना और पैसों के लेन-देन (फाइनेंशियल ट्रेल) का पूरी तरह पता लगाया जा सके। इस बड़ी घटना के बाद एक बार फिर राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि इस गिरोह से जुड़े किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा।