उत्तराखंड के लाल का दिल्ली में बजा डंका: मुशाहिद अली को राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार, मुठभेड़ में 3 नक्सलियों को किया था ढेर
ऊधम सिंह नगर। देवभूमि के वीरों ने एक बार फिर देश के पटल पर अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया है। ऊधम सिंह नगर जिले के सीमांत क्षेत्र खटीमा के इस्लामनगर निवासी सीआरपीएफ जवान मुशाहिद अली को उनकी अदम्य वीरता और साहस के लिए प्रतिष्ठित 'राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। 9 अप्रैल 2026 को दिल्ली में आयोजित 'शौर्य दिवस' समारोह के दौरान सीआरपीएफ के महानिदेशक (DG) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा।
मुशाहिद अली की बहादुरी की कहानी जुलाई 2019 की उस रात से जुड़ी है, जब वे कोबरा कमांडो के रूप में तैनात थे। बिहार-औरंगाबाद बॉर्डर के चकरबंदा के घने जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ 'सर्च एंड डिस्ट्रॉय ऑपरेशन (शैडो)' चलाया जा रहा था। 25 जुलाई 2019 को हुई भीषण मुठभेड़ के दौरान मुशाहिद ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मोर्चा संभाला और अकेले तीन खूंखार नक्सलियों को मौत के घाट उतार दिया। उनकी इस जांबाजी ने न केवल ऑपरेशन को सफल बनाया, बल्कि नक्सलियों के हौसले पस्त कर दिए। वर्ष 2014 में दिल्ली से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में भर्ती हुए मुशाहिद अली वर्तमान में छत्तीसगढ़ के सबसे चुनौतीपूर्ण नक्सल प्रभावित इलाकों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी वीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शौर्य दिवस पर देशभर से चुने गए केवल सात जवानों में मुशाहिद अली का नाम शामिल था। इस सम्मान की घोषणा 26 जनवरी 2025 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर की गई थी। जैसे ही मुशाहिद अली को दिल्ली में सम्मानित किए जाने की खबर खटीमा पहुँची, इस्लामनगर समेत पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया। स्थानीय युवाओं के लिए मुशाहिद अली अब एक आदर्श बन चुके हैं। उनके पिता और परिवार का कहना है कि मुशाहिद ने न केवल अपने खानदान का, बल्कि पूरे उत्तराखंड का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। वही मुशाहिद अली की इस उपलब्धि पर उनके परिवार, मित्रों और पूरे मोहल्ले में गर्व और खुशी का माहौल है। उनकी बहादुरी युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही।