उत्तराखंड में विधानसभा का विशेष सत्र 28 को: 'नारी सम्मान' पर होगी चर्चा,अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर कसी कमर
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने आगामी 28 अप्रैल को होने वाले एक दिवसीय विशेष सत्र की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। सोमवार को विधानसभा परिसर में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने अधिकारियों को सुरक्षा, यातायात और अन्य आवश्यक प्रबंधों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के कड़े निर्देश दिए। इस विशेष सत्र का मुख्य आकर्षण 'नारी सम्मान-लोकतंत्र में अधिकार' विषय पर होने वाली चर्चा होगी, जिसे गरिमामय ढंग से संपन्न कराने के लिए शासन और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।
विधानसभा अध्यक्ष ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कानून-व्यवस्था, वीआईपी एवं आगंतुक प्रबंधन, और फायर सेफ्टी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि सत्र की मर्यादा को बनाए रखते हुए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा, "सभी विभागों के सहयोग से इस विशेष सत्र को सफलतापूर्वक और गरिमामय ढंग से संपन्न कराया जाएगा। सत्र के दौरान अक्सर शहर में लगने वाले जाम और यातायात की समस्याओं को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने पुलिस प्रशासन को विशेष हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था और पार्किंग की योजना इस तरह बनाई जाए कि सत्र की सुरक्षा भी बनी रहे और आम जनता को आवाजाही में किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके साथ ही पेयजल, स्वच्छता, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और संचार तंत्र को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में शासन और पुलिस प्रशासन के दिग्गज अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ, सचिव गृह शैलेश बगोली और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर वी. मुरुगेशन शामिल थे। अधिकारियों ने अध्यक्ष को आश्वस्त किया कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर मीडिया प्रबंधन तक की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह विशेष सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें 'नारी सम्मान' जैसे गंभीर और सामयिक विषय पर मंथन किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने प्रभारी सचिव चंद्र पंत और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि सत्र के दौरान व्यवस्थाएं इतनी सुदृढ़ हों कि चर्चा का मूल उद्देश्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।