बिहार विधानसभा सत्र का अंतिम दिन तूफानी: पटना छात्र आंदोलन और आरक्षण पर जमकर हंगामा,सीएजी रिपोर्ट और लाठीचार्ज पर घिरी सरकार
पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन सदन के अंदर से लेकर बाहर तक जबर्दस्त सियासी घमासान देखने को मिला। नीट पेपर लीक, पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और आंदोलन के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। वहीं, प्रमोशन में अनुसूचित जाति आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष के विधायक ही अपनी सरकार को घेरते नजर आए।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष का जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके कारण विधानसभा की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। सदन में प्रमोशन में अनुसूचित जाति के आरक्षण का मुद्दा खुद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने उठाया। जेडीयू विधायक मनीष कुमार ने सवाल किया कि हर भर्ती में अनुसूचित जाति के लिए निर्धारित 16 प्रतिशत आरक्षण के बावजूद शून्य या बेहद कम रिक्तियां दिखाई जा रही हैं। सत्ता पक्ष के श्याम रजक समेत अन्य दलित विधायकों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई। इस पर मंत्री बिजेंद्र यादव ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 17 प्रतिशत उच्चतर प्रभार वाली भर्तियों में एससी-एसटी के लिए पद फ्रिज किए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले पर आगे बैठकर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। शून्यकाल के दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर ने बिहार सरकार की स्कूल नामकरण नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि स्कूल निर्माण के लिए जमीन दान करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और समाजसेवियों के नाम हटाना ऐतिहासिक विरासत से छेड़छाड़ है। उन्होंने 'बिहार मॉडल स्कूलों' का नाम 'सरस्वती विद्या मंदिर' किए जाने के फैसले का पुरजोर विरोध किया। सदन में लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई को लेकर जमकर तीखी बहस हुई। माले विधायक शशि यादव ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान पुलिस अधिकारी ने उनका हाथ मरोड़ा। वहीं, बीजेपी विधान पार्षद ने महिला अधिकारी द्वारा बीजेपी पार्षद अनामिका पटेल के साथ दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। दूसरी ओर, लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्रों की आड़ में उपद्रवियों ने हिंसा की और विपक्ष उनका समर्थन कर रहा है। उन्होंने इस घटना के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की, जिससे सदन में फिर हंगामा बढ़ गया। सत्र के अंतिम दिन 23 जुलाई को पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक रिपोर्ट को लेकर भी विपक्ष के तेवर सख्त रहे, जिसमें 93 हजार करोड़ रुपये से अधिक के उपयोगिता प्रमाण पत्र गायब होने और कई वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। दूसरी तरफ, पिछले चार दिनों से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सदन से गायब रहने पर सत्ता पक्ष ने राजद पर जमकर निशाना साधा। मानसून सत्र के दूसरे हाफ में 'पथ निर्माण विभाग अभियंत्रण सेवा भर्ती संशोधन नियमावली-2026' और 'बिहार तकनीकी सेवा संशोधन नियमावली' की प्रति सदन पटल पर रखी जाएगी। इसके अलावा विधानसभा की विभिन्न समितियों के प्रतिवेदन पेश किए जाएंगे और गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के समापन भाषण के साथ मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए समाप्त हो जाएगा।