सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: परमानेंट कमीशन से वंचित सेना की महिला अफसरों को मिलेंगे सभी पेंशन लाभ
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि परमानेंट कमीशन (PC) से वंचित महिला अधिकारियों को अब पूरी पेंशन और अन्य सभी लाभ मिलेंगे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह फैसला विंग कमांडर सुचेता ईडन और अन्य महिला अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनाया। बेंच ने साफ कहा कि महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन न देने की व्यवस्था व्यक्तिगत मूल्यांकन का नतीजा नहीं, बल्कि प्रणालीगत भेदभाव का परिणाम थी। कोर्ट ने कहा किया कि महिला अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACRs) उस धारणा के साथ लिखी जाती थीं कि वे करियर में आगे नहीं बढ़ पाएंगी, क्योंकि सेवा के शुरुआती 10 वर्षों तक उन्हें परमानेंट कमीशन के लिए पात्र नहीं माना जाता था। इससे उनकी मेरिट प्रभावित हुई और पुरुष समकक्षों की तुलना में वे नुकसान में रहीं। बेंच ने कहा, “महिलाओं के लिए करियर में सीमित प्रगति की यह जमी-जमाई धारणा उनके मूल्यांकन को कमजोर करती रही।” अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए राहत दी। फैसले के अनुसार, 2019, 2020 और 2021 में परमानेंट कमीशन के लिए विचार की गई सभी महिला SSC अधिकारियों को 20 साल की अनिवार्य सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा। वे पेंशन और अन्य सभी लाभों की हकदार होंगी, हालांकि उन्हें पिछले वेतन का बकाया नहीं मिलेगा। पेंशन 1 नवंबर 2025 से प्रभावी होगी। बेंच ने स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों को पहले ही परमानेंट कमीशन दे दिया गया है, उनके दर्जे में कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही, जिन्हें वर्तमान में सक्रिय सेवा में नहीं रखा गया है, उनके लिए विंग कमांडर रैंक पर काल्पनिक टाइम-स्केल प्रमोशन की मांग खारिज कर दी गई।कोर्ट ने थल सेना, वायुसेना और नौसेना के मामलों पर अलग-अलग गौर किया। वायुसेना के मामले में पाया गया कि 2019 में लागू “सर्विस लेंथ क्राइटेरिया” और “मिनिमम परफॉर्मेंस क्राइटेरिया” बहुत जल्दबाजी में लागू किए गए, जिससे अधिकारियों को इन्हें पूरा करने का उचित अवसर नहीं मिल सका। यह फैसला महिला अधिकारियों के लंबे संघर्ष का नतीजा है। इससे हजारों महिला SSC अधिकारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए महिला अधिकारियों ने इसे ‘न्याय की जीत’ बताया है। रक्षा मंत्रालय अब इस फैसले को लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।