चमचमाते होटलों पर भारी 'शिव-पार्वती' का धाम: त्रियुगीनारायण बना देश का पसंदीदा आध्यात्मिक वेडिंग डेस्टिनेशन, 5 महीने में हुईं 100 शादियां
रुद्रप्रयाग। आधुनिक डेस्टिनेशन वेडिंग की चकाचौंध को पीछे छोड़ते हुए उत्तराखंड का पौराणिक 'त्रियुगीनारायण मंदिर' आज देश के नवयुगलों के लिए आस्था और विवाह का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। पावन केदारघाटी में समुद्र तल से ऊंचाई पर स्थित इस धाम की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2026 की शुरुआत (जनवरी) से लेकर अब तक यहां करीब 100 जोड़े सात फेरे ले चुके हैं। वहीं, बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद से ही महज कुछ दिनों में ही लगभग 40 नवयुगल यहां विवाह बंधन में बंध चुके हैं।
इस पौराणिक स्थल के प्रति युवाओं में बढ़ते क्रेज की सबसे बड़ी वजह इसका अलौकिक इतिहास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन भूमि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें स्वयं भगवान विष्णु साक्षी बने थे। विवाह के समय जो पवित्र अग्नि प्रज्ज्वलित हुई थी, वह आज भी मंदिर परिसर में अखंड रूप से जल रही है, जिसे “धनंजय अग्नि” कहा जाता है। देश के कोने-कोने से आने वाले दूल्हा-दुल्हन इसी दिव्य और अमर अग्नि के फेरे लेकर अपने नए जीवन की शुरुआत करते हैं। माना जाता है कि यहां शादी करने वाले दंपत्तियों को साक्षात शिव-पार्वती का आशीर्वाद मिलता है और उनका वैवाहिक जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है। तीर्थपुरोहित समिति के सदस्य राजेश भट्ट बताते हैं कि त्रियुगीनारायण मंदिर अब देश भर के नवयुगलों की पहली पसंद बन चुका है। यहां न केवल शादियां हो रही हैं, बल्कि अपनी शादी की सालगिरह (वेडिंग एनिवर्सरी) मनाने के लिए भी बड़ी संख्या में दंपति पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया और धार्मिक पर्यटन (स्पिरिचुअल टूरिज्म) के बढ़ते प्रभाव के कारण दिल्ली, मुंबई, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से हर दिन सैकड़ों लोग यहां पहुंच रहे हैं। आने वाले आगामी शुभ मुहूर्तों के लिए भी मंदिर में शादियों की भारी एडवांस बुकिंग और पूछताछ चल रही है। बर्फ की सफेद चादर से ढकी हिमालयी चोटियों के बीच बसा यह मंदिर आस्था, अध्यात्म और कुदरती खूबसूरती का एक अद्भुत संगम है। मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन कुंड, शांत वातावरण और अखंड धूनी यहां आने वाले हर शख्स को एक अनोखी शांति का अहसास कराते हैं। यही वजह है कि अब यह देवभूमि का यह पावन स्थल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़े 'धार्मिक वेडिंग डेस्टिनेशन' के रूप में अपनी नई और मजबूत पहचान बना रहा है।