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उत्तराखंड की राजनीति के ‘मिशन क्लीन’ का अंत! नहीं रहे पूर्व सीएम मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी, प्रदेश में 3 दिन का राजकीय शोक

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 19, 2026 12:05 PM
The End of Uttarakhand Politics' 'Mission Clean'! Former CM Major General Bhuwan Chandra Khanduri Passes Away; Three Days of State Mourning Declared in the State.

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में शुचिता, अनुशासन और बेदाग ईमानदारी के प्रतीक पुरुष, पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी का मंगलवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उन्होंने देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे देश और विशेषकर उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। राजनेताओं से लेकर आम जनता तक हर कोई स्तब्ध है। इसे उत्तराखंड की सियासत में एक युग का अंत माना जा रहा है।

राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के सम्मान में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इसके साथ ही बुधवार को प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों को बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। उनका अंतिम संस्कार कल (बुधवार) को पवित्र नगरी हरिद्वार में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे भुवन चंद्र खंडूड़ी का झुकाव हमेशा से देश सेवा की ओर था। उन्होंने भारतीय सेना के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कोर में एक लंबा और शानदार समय बिताया। अपनी असाधारण कार्यकुशलता, कड़े अनुशासन और अद्वितीय सेवाभाव के लिए उन्हें 1982 में राष्ट्रपति द्वारा ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था। मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता का रुख जनसेवा और राजनीति की ओर किया। वर्ष 1991 में वे पहली बार गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद वे लगातार कई बार संसद पहुंचे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख पहाड़ी नेताओं व शिल्पकारों में अपनी मजबूत पहचान बनाई। भुवन चंद्र खंडूड़ी की प्रशासनिक क्षमता का लोहा पूरे देश ने तब माना जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें देश के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) की कमान सौंपी। उनके इस कार्यकाल को देश में सड़क क्रांति के स्वर्ण युग के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने ‘राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना’ और 'प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना' को धरातल पर उतारने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के दूरस्थ गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ने में उनकी दूरदृष्टि और प्रशासनिक सख्ती का कोई सानी नहीं था। जब उत्तराखंड में भाजपा को एक बेहद ईमानदार और कड़क चेहरे की जरूरत थी, तब खंडूड़ी आगे आए। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को 'मिशन क्लीन' और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के लिए जाना जाता है। उन्होंने कड़े फैसले लेने में कभी संकोच नहीं किया, जिसके चलते राज्य में "खंडूड़ी हैं जरूरी" का नारा हर जुबान पर चढ़ गया था। उनके निधन पर देश के शीर्ष नेताओं और उत्तराखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री सहित तमाम राजनीतिक दलों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। शोक संदेशों में उन्हें एक ऐसा 'सैनिक-राजनेता' बताया गया जिसने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। खंडूड़ी का जाना केवल एक राजनेता का जाना नहीं है, बल्कि उस राजनीतिक शुचिता का अवसान है जो आज के दौर में दुर्लभ है। उत्तराखंड की जनता अपने इस 'जनरल' को हमेशा अपनी वादियों, अपनी सड़कों और अपनी यादों में जिंदा रखेगी।


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