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नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार: एक दशक में 10 हजार से अधिक माओवादियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, खत्म हुआ शीर्ष नेतृत्व

editor
  • Tapas Vishwas
  • March 29, 2026 02:03 PM
The Final Assault on Naxalism: Over 10,000 Maoists Renounce Violence in a Decade; Top Leadership Eliminated.

नई दिल्ली। देश की आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर केंद्र सरकार को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीतियों के चलते पिछले एक दशक में 10,000 से अधिक माओवादियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का विकल्प चुना है। गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नक्सलियों का शीर्ष नेतृत्व लगभग खत्म हो चुका है और अब यह समस्या अपने अंतिम चरण में है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए 31 मार्च तक की समयसीमा निर्धारित की है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में अकेले 2,300 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 630 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की 'एक एकीकृत और निर्णायक रणनीति' ने पिछली सरकारों के बिखरे हुए दृष्टिकोण की जगह ले ली है, जिसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिख रहे हैं। कभी बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में फैला 'रेड कॉरिडोर' (पशुपति से तिरुपति तक) अब सिमट कर रह गया है। जहाँ पहले ठेकेदार काम करने से डरते थे, वहाँ अब सीमा सड़क संगठन (BRO) ने कमान संभालते हुए पीएलजीए (PLGA) के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पांच प्रमुख सड़कें और छह महत्वपूर्ण पुल बनाए हैं। पिछले 10 वर्षों में इन क्षेत्रों में 12,250 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा किया गया है। सुरक्षा के बुनियादी ढांचे में भी भारी निवेश किया गया है। साल 2014 में इन क्षेत्रों में केवल 66 थाने थे, जिनकी संख्या पिछले 10 साल में बढ़कर 586 हो गई है। इसके अलावा, बीते साल में 361 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं। अभियान को गति देने के लिए 68 ऐसे हेलीपैड बनाए गए हैं जहाँ रात में भी हेलीकॉप्टर उतर सकते हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि 2013 में जहाँ 76 जिलों के 330 थानों में नक्सली घटनाएं दर्ज होती थीं, वे जून 2025 तक घटकर केवल 22 जिलों के 52 थानों तक सीमित रह गई हैं। नक्सलवाद के सामाजिक-आर्थिक कारणों को खत्म करने के लिए सरकार ने शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत घरों की संख्या मार्च 2024 के 92,847 से बढ़कर अक्टूबर 2025 में 2.54 लाख से अधिक हो गई है। आयुष्मान कार्ड और आधार पंजीकरण में भी भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में 250 से अधिक एकलव्य विद्यालयों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 179 सुचारू रूप से चल रहे हैं। स्पष्ट है कि सुरक्षा और विकास की इस दोहरी रणनीति ने नक्सलियों के गढ़ को ढहा दिया है और अब देश 'नक्सल मुक्त भारत' के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।


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