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जंग का वैश्विक असरः होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल आपूर्ति पर बड़ा संकट! कई देशों में राशनिंग, भारत सरकार ने उठाया सख्त कदम

editor
  • Awaaz Desk
  • March 10, 2026 09:03 AM
The global impact of the war: The closure of the Strait of Hormuz has created a major crisis for oil supplies! Many countries are rationing, and the Indian government has taken strict measures.

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की वजह से भारत सहित दुनिया के कई देश बड़े फ्यूल संकट का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान, फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी, पोलैंड, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बंद होने के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 25 फीसदी तक का उछाल आया है। स्थिति को संभालने के लिए सरकारें राशनिंग, स्कूल बंदी और सरकारी कामकाज में कटौती जैसे कड़े कदम उठा रही हैं। पैनिक बाइंग और आपूर्ति की अनिश्चितता की वजह से नागरिकों में चिंता का माहौल है, जो ईंधन बचाने के लिए कतारों में खड़े हैं। मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रहा है। दुनिया का करीब 31 प्रतिशत समुद्री कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस इसी रास्ते से गुजरते हैं। जंग की वजह से यह रास्ता बाधित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा व्यापार पूरी तरह अस्थिर हो गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचा, तो कच्चे तेल की कीमतें 120 से 140 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। दुनिया भर में शेयर बाजार भी इस अस्थिरता से प्रभावित हो रहे हैं और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति को लेकर सरकार का बड़ा फैसला
केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलिंडर की जमाखोरी रोकने और घरेलू गैस संकट को टालने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लागू किया है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना और काले बाजारी गतिविधियों पर रोक लगाना है। सूत्रों के अनुसार ईएसएमए लागू होने के बाद प्राथमिक सेक्टर्स को एलपीजी और अन्य ईंधन की सप्लाई में विशेष प्रायोरिटी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अस्पताल, स्कूल, सरकारी संस्थान और अन्य महत्वपूर्ण सेक्टरों को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में एलपीजी सिलिंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई थी। ऐसे में ईएसएमए का लागू होना संकट से निपटने और आम जनता को राहत देने का बड़ा कदम है। सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘एस्मा’ कानून के तहत तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस कदम का उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण संभावित आपूर्ति बाधाओं से निपटना है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की एलपीजी खपत 3.13 करोड़ टन रही, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया गया था और शेष की मात्रा आयात पर निर्भर थी।


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