चोल साम्राज्य का गौरव लौटेगा वतन: नीदरलैंड से भारत आ रहे 11वीं सदी के ऐतिहासिक ताम्रपत्र, पीएम मोदी की मौजूदगी में हुआ हैंडओवर
नई दिल्ली। भारत की प्राचीन संस्कृति, वैभव और ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर एक बार फिर बड़ी कामयाबी मिली है। महान चोल साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को बयां करने वाले अनैमंगलम काल के 11वीं शताब्दी के 24 दुर्लभ ताम्रपत्र (तांबे की प्लेट्स) जल्द ही नीदरलैंड से भारत वापस लाए जा रहे हैं। पांच देशों के अपने कूटनीतिक दौरे के तहत नीदरलैंड पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक और बेहद भावुक क्षण की जानकारी देशवासियों के साथ साझा की। डच अधिकारियों और लीडेन यूनिवर्सिटी के साथ हुए एक औपचारिक समझौते के बाद, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान इन ताम्रपत्रों को भारत को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई।
इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के अनुसार, ये ताम्रपत्र लगभग 1006 ईस्वी के हैं, जो चोल वंश के सबसे प्रतापी राजाओं में शुमार राजराज चोल प्रथम और उनके पराक्रमी पुत्र राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल से संबंधित हैं। इन 24 ताम्रपत्रों में 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेट्स शामिल हैं, जो एक विशेष धातु की अंगूठी से बंधी हुई हैं और जिन पर शाही सील (मुहर) लगी हुई है। इन पत्रों पर मुख्य रूप से तमिल और संस्कृत लिपि में राजाओं के आदेश और शिलालेख अंकित हैं। मुख्य रूप से, इनमें महान सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम द्वारा अपने पिता राजराज चोल के काल में दिए गए भूमि अनुदानों को औपचारिक और कानूनी रूप से दर्ज करने का विस्तृत उल्लेख है। बताया जाता है कि 19वीं शताब्दी के दौरान, भारत में औपनिवेशिक शासन के समय डच अधिकारियों द्वारा इन बेशकीमती ताम्रपत्रों को दक्षिण भारत से नीदरलैंड ले जाया गया था। साल 1862 से ये सभी ताम्रपत्र नीदरलैंड्स की विख्यात लीडेन यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में बेहद सुरक्षित तरीके से संरक्षित रखे गए थे। भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों और सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने की नीति के तहत अब इनकी वतन वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया 'एक्स' (ट्विटर) हैंडल पर इन ताम्रपत्रों की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा "यह सभी भारतीयों के लिए बेहद खुशी और गर्व का क्षण है। 11वीं सदी के चोल काल के तांबे के पत्र नीदरलैंड से भारत वापस लाए जाने वाले हैं। मैंने प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ इस गौरवशाली कार्यक्रम से जुड़े समारोह में भाग लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने चोल राजवंश की अदम्य सैन्य और नौसैनिक शक्ति, उनकी उत्कृष्ट प्रशासनिक व्यवस्था और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैले भारतीय संस्कृति के विस्तार की जमकर सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) की आधिकारिक यात्रा के दूसरे पड़ाव के तहत 17 मई को नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम पहुंचे। हवाई अड्डे पर डच मंत्रियों और वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान पीएम के सम्मान में एक शानदार सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें प्रवासी कलाकारों ने भारत की विविधता को दर्शाते हुए गरबा, कुचीपुड़ी, भरतनाट्यम, मोहिनीअट्टम और कथक जैसे शास्त्रीय नृत्यों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियां दीं। इसके बाद द हेग शहर में भारतीय समुदाय को संबोधित करने के साथ ही दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच द्विपक्षीय व्यापार, तकनीक और सुरक्षा पर अहम वार्ता भी संपन्न हुई।