'हर-हर महादेव' के जयघोष के साथ आदि कैलाश यात्रा का भव्य आगाज! हरी झंडी दिखाकर 200 यात्रियों को किया रवाना,इस साल 1 लाख पर्यटकों की उम्मीद
पिथौरागढ़। हिमालय की गोद में बसे आदि कैलाश और ऊं पर्वत की पवित्र यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया। सीमांत धारचूला तहसील से उपजिलाधिकारी आशीष जोशी ने 200 शिवभक्तों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। शंखनाद और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष के बीच शुरू हुई इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यापारियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद यह क्षेत्र अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर चमकने लगा है। धारचूला से रवाना हुए यात्री लगभग 140 किलोमीटर का सफर तय कर गुंजी और कुटी होते हुए 'ज्योलिंगकांग' पहुंचेंगे। यहाँ पार्वती सरोवर के तट से श्रद्धालु 'आदि कैलाश' के भव्य दर्शन करेंगे। इसके बाद वापसी में यात्री नाभिढांग जाएंगे, जहाँ से विश्व प्रसिद्ध 'ऊं पर्वत' के दर्शन होंगे। प्रशासन के अनुसार, अब तक 500 यात्री आवेदन कर चुके हैं, जिनमें से 350 को इनर लाइन परमिट जारी कर दिया गया है।
अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे ने इस क्षेत्र की तकदीर बदल दी है। तीन साल पहले तक यहाँ पर्यटकों की संख्या 2 हजार से कम रहती थी, जो अब बढ़कर 30 हजार के पार पहुँच चुकी है। पर्यटन विभाग का अनुमान है कि इस साल यह आंकड़ा 1 लाख के पार जा सकता है। चारधाम यात्रा के विकल्प के रूप में युवा इसे काफी पसंद कर रहे हैं, क्योंकि आदि कैलाश यात्रा मात्र 5 से 7 दिन में पूरी हो जाती है। चीन सीमा से सटे होने के कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यहाँ सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास से सेना और ITBP की आवाजाही भी सुगम हुई है। यात्रा के दौरान पुलिस उपाधीक्षक धारचूला कुंवर सिंह रावत ने चालकों से पहाड़ी रास्तों पर यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है।चूँकि यह यात्रा 3,000 से 5,500 मीटर की ऊंचाई तक जाती है, इसलिए ऑक्सीजन की कमी और 'हाई एल्टीट्यूड सिकनेस' का खतरा बना रहता है। प्रशासन ने यात्रियों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट और इनर लाइन परमिट अनिवार्य कर दिया है। बढ़ती संख्या और हेलीकॉप्टर सेवाओं के कारण ग्लेशियर क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ गया है। प्रशासन कचरा प्रबंधन और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी कर रहा है। यात्रा शुरू होते ही धारचूला से लेकर ज्योलिंगकांग तक होमस्टे संचालकों, होटल व्यवसायियों और गाइडों के चेहरे खिल उठे हैं। आदि कैलाश यात्रा के पैकेज 25 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक उपलब्ध हैं, जिनमें मिड-रेंज से लेकर प्रीमियम सुविधाएं शामिल हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस यात्रा से सीमांत क्षेत्र की आजीविका को नई ऊँचाइयाँ मिलेंगी।