लोकतंत्र का महापर्व: बंगाल और तमिलनाडु में 'बंपर' वोटिंग, शाम 5 बजे तक बंगाल ने छुआ 90% का आंकड़ा, तमिलनाडु में भी उत्साह
देश के दो महत्वपूर्ण राज्यों, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में लोकतंत्र के महापर्व का आज भव्य नजारा देखने को मिला। मतदाताओं के भारी उत्साह ने पिछले कई रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया है। पश्चिम बंगाल में जहाँ पहले चरण की 152 सीटों पर मतदान हुआ, वहीं तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर जनता ने एक ही चरण में अपनी नई सरकार चुनने के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ताजा आंकड़ों के अनुसार, शाम साढ़े पांच बजे तक दोनों राज्यों में ऐतिहासिक वोटिंग दर्ज की गई है। राज्य में मतदाताओं का जबरदस्त जोश दिखा और यहाँ 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। दक्षिण भारत के इस प्रमुख राज्य में भी लंबी कतारें देखी गईं और यहाँ 82.24 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। दोपहर बाद से ही दोनों राज्यों में मतदान की गति काफी तेज रही। दोपहर 3 बजे जहाँ बंगाल 78.77% पर था, वहीं शाम होते-होते यह आंकड़ा ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। बंगाल की 152 सीटों पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। प्रशासन की मुस्तैदी का ही परिणाम रहा कि छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई।
बहरामपुर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार और दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी ने मतदान के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य में इस बार 'एंटी-इंकंबेंसी' (सत्ता विरोधी लहर) का असर साफ दिख रहा है। चौधरी ने विशेष रूप से चुनाव आयोग की सख्ती का उल्लेख करते हुए कहा कि कड़े ऑब्जर्वर सिस्टम और आयोग की सक्रियता के कारण क्षेत्रों में गुंडागर्दी और डराने-धमकाने की घटनाओं में भारी कमी आई है। उन्होंने इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की दिशा में एक बड़ी जीत बताया। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक साथ वोटिंग होने से आज राज्य के सभी दिग्गजों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। यहाँ सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। वहीं बंगाल में पहले चरण के इस भारी मतदान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इतना अधिक मतदान प्रतिशत अक्सर बड़े बदलाव का संकेत होता है। मतदान केंद्रों पर पहली बार वोट डालने वाले युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में भारी उत्साह देखा गया। कड़ी धूप के बावजूद लोग अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। शांतिपूर्ण मतदान और भारी प्रतिशत ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं।