हरिद्वार अर्धकुंभ बनाम कुंभ विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई! याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा- धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला, सरकार को दें प्रत्यावेदन
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 2027 में हरिद्वार में लगने वाले अर्ध कुम्भ को लेकर सरकार द्वारा कुम्भ का नाम देकर केंद्र सरकार से बड़े बजट की मांग करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने जनहित याचिका को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को सवंत्रता दी है कि वे इस सम्बंध में अपना प्रत्यावेदन राज्य सरकार को दें सकते हैं। क्योंकि यह धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ मामला है। आप अपनी याचिका वापस लें। मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी गंगा सभा हरिद्वार के अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि हरिद्वार में 2027 में अर्ध कुम्भ लगने वाला है। लेकिन सरकार अर्ध कुम्भ को कुम्भ का नाम देकर प्रचार प्रसार कर रही है। जो लोगों की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है। कुम्भ का नाम देकर केंद्र से बड़े बजट की मांग कर रही है। कुम्भ बारह साल में एक बार लगता है। जो हरिद्वार और प्रयागराज में लगता है। नासिक और उज्जैन में कुम्भ नही लगता। हर छः साल के अर्ध कुम्भ लगता है। 2021 में कुम्भ लगा था अगला 2033 में लगेगा। ठीक उसके आधे में अर्ध कुम्भ 2027 में लगने वाला है। सरकार अर्ध कुम्भ को कुम्भ का नाम देकर लोगों को भृमित कर रही है। यही नही अर्ध कुम्भ में शाही स्नान नही होता है। कुम्भ में शाही स्नान होता है। कुम्भ का नाम दिया है तो शाही स्नान भी होगा और अन्य श्रद्धालु स्नान करने से वंचित रह जाएंगे। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई थी कि इसे कुम्भ के नाम से प्रचार प्रसार न किया जाय। यह चली आ रही धार्मिक भावनाओ के विरुद्ध है।