आज ही के दिन हुआ था जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ विलय, पूरे हुए 75 वर्ष
जम्मू- कश्मीर विलय: जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ विलय होना दशकों बाद भी इतिहास में अमर है। भारत के इतिहास में विलय दिवस की गाथा ने विशेष स्थान बनाया है। इस अहम दिन को याद रखते हुए हर साल 26 अक्तूबर को विलय दिवस मनाया जाता है। राजनेताओं और इतिहासकारों के अनुसार विलय दिवस की बदौलत जम्मू-कश्मीर के लोगों को भारतीय नागरिक होने का गौरव हासिल हुआ है।
डोगरा इतिहास को स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की जा रही है। दशकों पहले दबाए गए डोगरा इतिहास के साथ युवाओं को अवगत करवाने पर सरकार खास ध्यान दे रही है, ताकि डोगरा शासन में जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक, आर्थिक, समाजिक और सांस्कृतिक स्थिति की डोगरा समाज की जानकारी युवाओं में मिल सके।
इतिहास में साक्षी है 26 अक्तूबर 1947 का दिन
इतिहासकारों के अनुसार 24 अक्तूबर, 1947 को कबाइलियों ने रियासत पर ताबड़तोड़ हमले किए थे। यह सूचना मिलते ही ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह अपनी सेना की टुकड़ी के साथ कश्मीर की उड़ी सीमा पर पहुंचे। तब तक कबाइली गिलगित और बाल्टिस्तान सहित कई इलाकों पर कब्जा कर चुके थे। मुठभेड़ के दौरान कबाइलियों को सेना ने खदेड़ा, लेकिन मुजफराबाद क्षेत्र को पूरी तरह से कबाइली घेर चुके थे। वर्तमान में इस क्षेत्र को पाकिस्तान अनाधिकृत क्षेत्र कहा जाता है। मुठभेड़ के दौरान सेना के कई जवान शहीद हुए थे, लेकिन ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने हार नहीं मानी और गोली लगने के बाद भी भूखे-प्यासे दुश्मनों का सामना करते रहे। तीसरे दिन उन्होंने दम तोड़ दिया था।
रियासत को बचाने के लिए महाराजा ने मांगी थी मदद
जम्मू-कश्मीर रियासत को कबाइलियों से बचाने के लिए महारजा हरि सिंह ने केंद्र सरकार की मदद मांगी थी। तब की सरकार ने महाराजा के साथ विलय करने की शर्त रखी। 26 अक्तूबर, 1947 को विलय होते ही भारतीय सेना ने घाटी के सीमांत क्षेत्रों में पहुंचकर बिगड़ी स्थिति पर काबू पाया था। तब से जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंक बना है।
अब विलय दिवस के साथ महाराजा हरि सिंह की जयंती पर भी अवकाश
राजनीति के साथ समाज के लिए भी महाराजा हरि सिंह ने अनेक कार्य किए हैं। उनके योगदान के आधार पर प्रदेश में दो बार अवकाश मनाया जाता है। पहले तो राजनीतिक दृष्टि से विलय दिवस पर 26 अक्तूबर को ही अवकाश होता था, लेकिन अब डोगरों की मांग और संघर्ष के बाद 23 अक्तूबर को महाराजा हरि सिंह की जयंती पर भी आवकाश घोषित कर दिया गया है।