देवभूमि से बंगाल तक गूंजेगा 'शक्ति' संदेश: डाट काली मंदिर में शीश नवाएंगे पीएम मोदी,एक्सप्रेस-वे के साथ चुनावी शंखनाद
देहरादून। उत्तराखंड की पावन धरा से एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति को दिशा देने वाला महा-संदेश निकलने जा रहा है। आगामी 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देहरादून दौरा केवल विकास परियोजनाओं के लोकार्पण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी गूंज सीधे पश्चिम बंगाल के चुनावी रण तक सुनाई देगी। प्रधानमंत्री देहरादून के ऐतिहासिक मां डाट काली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर देश को 'शक्ति' का संदेश देंगे, जिसे बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा की एक बड़ी रणनीतिक बिसात माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री का यह दौरा बहुस्तरीय उद्देश्यों से प्रेरित है। एक ओर जहां वे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का शुभारंभ कर उत्तर भारत की कनेक्टिविटी में नया अध्याय जोड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर शक्तिपीठ मां डाट काली के दर पर मत्था टेककर अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक निष्ठा को प्रदर्शित करेंगे। यह मंदिर देहरादून और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है और सदियों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड के इस शक्तिपीठ से प्रधानमंत्री का संदेश सीधे पश्चिम बंगाल की जनता तक पहुंचेगा। बंगाल, जो मां दुर्गा (शक्ति) की उपासना के लिए सुविख्यात है, वहां के मतदाताओं के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव स्थापित करने के लिए पीएम मोदी का यह कदम मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। भाजपा इस कार्यक्रम को केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और खासकर पूर्वी भारत की राजनीति से जोड़कर देख रही है। मां डाट काली मंदिर का धार्मिक महत्व अत्यंत खास है। यहां मां दुर्गा के ही एक रूप की पूजा होती है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ वर्षों से जल रही अखंड ज्योति है, जिसे कभी बुझने नहीं दिया गया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले यात्री अपनी यात्रा की मंगलकामना के लिए यहाँ माथा जरूर टेकते हैं। प्रधानमंत्री भी यहाँ सूक्ष्म पूजा-अर्चना कर नए एक्सप्रेस-वे के सुखद भविष्य और राष्ट्र की समृद्धि की अरदास करेंगे। 14 अप्रैल का दिन सामाजिक न्याय के प्रतीक डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती का भी है। इस दिन प्रधानमंत्री का उत्तराखंड दौरा सामाजिक समरसता, धार्मिक आस्था और विकास की राजनीति का एक 'त्रिवेणी' संगम प्रस्तुत करेगा। भाजपा इस मौके को पूरी तरह भुनाने की तैयारी में है, ताकि संदेश स्पष्ट जाए कि सरकार विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर चल रही है। प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर शासन-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। मुख्य सचिव आनंद वर्धन और डीजीपी दीपम सेठ ने स्वयं मंदिर परिसर का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस दौरे पर निशाना साधते हुए इसे पूरी तरह 'राजनीतिक' करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा धर्म का उपयोग हमेशा चुनावी लाभ के लिए करती आई है और बंगाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए देवभूमि के मंदिरों का सहारा लिया जा रहा है। इतिहास गवाह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने केदारनाथ और बदरीनाथ की गुफाओं से हमेशा बड़े वैश्विक संदेश दिए हैं। इस बार डाट काली मंदिर की 'शक्ति' के माध्यम से बंगाल के चुनावी रण को साधने की यह कोशिश भारतीय राजनीति में आस्था और रणनीति के अनोखे मेल को दर्शाती है। अब देखना यह होगा कि देवभूमि से उठी यह गूंज बंगाल के मतदाताओं के दिलों तक कितनी गहराई से उतरती है।