'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़ने का ऑफर पड़ सकता है भारी! वायरल फिशिंग लिंक से चोरी हो रहा निजी डेटा, लुधियाना पुलिस ने जारी की बड़ी साइबर एडवाइजरी
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहे डिजिटल संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) का नाम अब साइबर अपराधियों के लिए नया हथियार बन गया है। सिस्टम बदलने, संगठन से जुड़ने और बड़ी जिम्मेदारी मिलने का लालच देकर लोगों, खासकर युवाओं, को फिशिंग लिंक भेजे जा रहे हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन लिंक पर क्लिक करता है, उसका मोबाइल या अन्य डिवाइस साइबर अपराधियों के निशाने पर आ जाता है। इसके जरिए बैंकिंग जानकारी, निजी दस्तावेज, फोटो और अन्य संवेदनशील डाटा तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए लुधियाना पुलिस ने लोगों को सतर्क करने के लिए अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जागरूकता अभियान शुरू किया है। पुलिस ने 42 सेकंड का एक विशेष वीडियो जारी कर लोगों को इस नए साइबर फ्रॉड के तरीके से सावधान रहने की अपील की है। पुलिस के अनुसार अब तक इस तरह की 6 से 7 शिकायतें सामने आ चुकी हैं। हालांकि समय रहते सतर्कता बरतने के कारण अभी तक किसी व्यक्ति के साथ आर्थिक ठगी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस इसे बेहद गंभीर साइबर खतरे के रूप में देख रही है।
ट्रेंडिंग नाम का उठा रहे फायदा, एक क्लिक और डिवाइस पर अपराधियों का कब्जा
पुलिस के अनुसार इन दिनों सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए साइबर ठग लोगों को एक आकर्षक लिंक भेज रहे हैं। लिंक के साथ दावा किया जाता है कि यदि देश को बदलना है तो पार्टी से जुड़ें और रजिस्ट्रेशन के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें। लिंक पर क्लिक करते ही व्यक्ति को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह पार्टी का सदस्य बन गया है और उसे व्हाट्सऐप ग्रुप, मैसेंजर या इंस्टाग्राम नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा। इसी भरोसे में लोग अनजाने में लिंक खोल देते हैं और यहीं से साइबर अपराधियों का जाल सक्रिय हो जाता है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार फिशिंग लिंक पर क्लिक करने के बाद अपराधी डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। इसके बाद मोबाइल या लैपटॉप में मौजूद बैंकिंग डिटेल, व्यक्तिगत फोटो, दस्तावेज और अन्य संवेदनशील जानकारियां उनके निशाने पर आ सकती हैं। इन जानकारियों का इस्तेमाल बैंक खाते से रकम निकालने, ब्लैकमेल करने या पहचान संबंधी धोखाधड़ी जैसे अपराधों में किया जा सकता है। यह फर्जी लिंक मुख्य रूप से व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम इनबॉक्स और मैसेंजर के माध्यम से भेजे जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोग इनके संपर्क में आ रहे हैं।
पद और ग्राफिक का लालच भी बना जाल
ठग केवल लिंक भेजने तक सीमित नहीं हैं। कई मामलों में लोगों से उनकी फोटो मांगी जाती है और फिर उन्हें पार्टी का पदाधिकारी बताते हुए आकर्षक ग्राफिक बनाकर भेजा जाता है। इससे लोगों को विश्वास हो जाता है कि वे वास्तव में संगठन का हिस्सा बन गए हैं। पुलिस का कहना है कि इस प्रक्रिया में भेजी गई तस्वीरों और अन्य जानकारियों का दुरुपयोग किया जा सकता है। अपराधी इनका इस्तेमाल फर्जी पहचान पत्र बनाने, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी या अन्य साइबर अपराधों में कर सकते हैं।
पुलिस का जागरूकता अभियान, जारी की एडवाइजरी
लुधियाना पुलिस ने इस नए साइबर खतरे को देखते हुए 42 सेकंड का एक जागरूकता वीडियो जारी किया है। वीडियो में पुलिस अधिकारी अमरिंदर सिंह सरल भाषा में बताते हैं कि किस तरह एक फर्जी लिंक पर किया गया एक क्लिक किसी व्यक्ति की निजी और वित्तीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। वीडियो में दृश्य उदाहरणों के माध्यम से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। यदि गलती से किसी ने संदिग्ध लिंक खोल दिया है तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं और निकटतम साइबर थाने में लिखित शिकायत दें। इसके अलावा बैंक से संपर्क कर ऑनलाइन लेन-देन पर अस्थायी रोक लगाने, डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड ब्लॉक कराने, संदिग्ध संदेशों को बिना खोले डिलीट करने और रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है। यदि लिंक पर क्लिक हो चुका है तो फोन को तुरंत बंद कर साइबर पुलिस से संपर्क करने की भी अपील की गई है। पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी भी लिंक, ऑफर या सदस्यता अभियान पर आंख बंद कर भरोसा न करें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें। थोड़ी सी सावधानी आपकी निजी जानकारी, बैंक खाते और डिजिटल पहचान को सुरक्षित रख सकती है।