बेतला नेशनल पार्क में ‘ओपन सफारी’ का सुपरहिट फॉर्मूला,रिकॉर्ड ₹1.20 करोड़ की आमदनी से चमकी दर्जनों परिवारों की किस्मत
पलामू। झारखंड के गौरव पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक बेतला नेशनल पार्क से एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। पार्क में पिछले साल शुरू की गई 'ओपन जंगल सफारी' की अनूठी पहल ने सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इस नए प्रयोग से न सिर्फ बेतला पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई है, बल्कि स्थानीय टूरिस्ट ऑपरेटरों की आमदनी में भी छप्परफाड़ बढ़ोतरी हुई है। साल 2025-26 के सीजन में ओपन सफारी के जरिए बेतला नेशनल पार्क को ₹1.20 करोड़ की रिकॉर्ड तोड़ आमदनी हुई है, जबकि इससे पहले पूरे सीजन में यह कमाई महज 3 से 5 लाख रुपये के आसपास सिमट कर रह जाती थी।
पलामू टाइगर रिजर्व का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। साल 1973 में जब देश भर में नौ टाइगर रिजर्व का गठन हुआ था, तब पलामू भी उसमें शामिल था। दिलचस्प बात यह है कि देश में सबसे पहले जंगल सफारी की शुरुआत पलामू से ही हुई थी और बाद में 1986 में इसके अंतर्गत बेतला नेशनल पार्क बनाया गया। लंबे समय तक यहां बंद गाड़ियों और पर्यटकों के निजी वाहनों (प्राइवेट गाड़ियों) से ही सफारी कराई जाती थी। लेकिन अक्टूबर 2025 में पार्क प्रबंधन ने एक क्रांतिकारी निर्णय लिया। बंद गाड़ियों को हटाकर उन्हें 'ओपन सफारी व्हीकल' के रूप में रीमॉडल किया गया। वर्तमान में ईको डेवलपमेंट समिति के माध्यम से कुल 33 ओपन गाड़ियां पर्यटकों को जंगल की सैर करा रही हैं, जिससे स्थानीय दर्जनों परिवारों की किस्मत पूरी तरह बदल गई है। पार्क प्रबंधन ने एक बेहतरीन रणनीति के तहत बाहर की निजी गाड़ियों के जंगल के अंदर प्रवेश करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसका सीधा फायदा स्थानीय बेरोजगार युवाओं और टूरिस्ट ऑपरेटरों को मिल रहा है। स्थानीय ऑपरेटर कुतुबुद्दीन अंसारी और नजीबुल्ला ने बताया कि पर्यटक काफी समय से ओपन सफारी की मांग कर रहे थे। प्रबंधन के साथ बैठक के बाद सभी ऑपरेटरों ने अपनी गाड़ियों को रीमॉडल कराया। अब ऑपरेटरों को प्रति ट्रिप (डेढ़ घंटे के लिए) ₹1100 मिलते हैं, जिससे उनकी दैनिक आय में भारी उछाल आया है।
"हमने पिछले दो-तीन वर्षों में स्थानीय टूरिस्ट ऑपरेटरों के साथ गहन बातचीत कर एक खास योजना तैयार की थी। सभी ऑपरेटरों को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर उन्हें जंगल और वन्यजीवों से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया गया। बाहर की गाड़ियों पर रोक लगाने का हमारा फैसला कारगर रहा और इतिहास में पहली बार सफारी से एक करोड़ से अधिक की आमदनी दर्ज की गई है। ओपन सफारी का रोमांच पर्यटकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। हवा में खुले आसमान के नीचे वन्यजीवों को निहारने का क्रेज इस कदर बढ़ा कि पहले जहां पूरे सीजन में मुश्किल से 40 हजार पर्यटक आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 80 हजार के करीब पहुंच गया है। इससे बेतला के होटल, गाइड और छोटे दुकानदारों का कारोबार भी चमक उठा है। यदि आप भी इस मानसून बेतला जाने की सोच रहे हैं, तो रुकिए! बेतला नेशनल पार्क में जंगल सफारी को अगले तीन महीनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। 1 जून से लेकर 30 सितंबर तक पार्क के अंदर किसी भी तरह की पर्यटक गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों के मुताबिक, यह समय वन्यजीवों का प्रजनन काल होता है। इस दौरान जानवरों को शांत और सुरक्षित माहौल देने के लिए पूरे पार्क इलाके में हाई अलर्ट जारी किया गया है और शिकारियों तथा बाहरी तत्वों पर नजर रखने के लिए स्पेशल पेट्रोलिंग (विशेष गश्त) चलाई जा रही है। 1 अक्टूबर से एक बार फिर यह पार्क नए कलेवर में सैलानियों का स्वागत करेगा।