मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: ट्रंप की घेराबंदी तैयार, ईरान की नाकेबंदी के लिए समुद्र में डटे 15 अमेरिकी जंगी जहाज
दुनिया एक बार फिर मिडिल ईस्ट में बड़े सैन्य टकराव के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी (ब्लॉकेड) के लिए कमर कस ली है। ताजा सैन्य आकलन के अनुसार, मिडिल ईस्ट के रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में इस वक्त अमेरिका के कम से कम 15 शक्तिशाली जंगी जहाज तैनात हैं, जो राष्ट्रपति ट्रंप के अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के ऑपरेशन एरिया में तैनात इस बेड़े का नेतृत्व विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन कर रहा है। इसके साथ 11 घातक डिस्ट्रॉयर जहाज तैनात हैं, जिनमें यूएसएस बैनब्रिज, यूएसएस थॉमस हडनर और यूएसएस जॉन फिन जैसे आधुनिक युद्धपोत शामिल हैं। इसके अलावा, त्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप (यूएसएस त्रिपोली, न्यू ऑरलियन्स और रशमोर) भी इलाके में मौजूद है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह फॉर्मेशन ईरान के व्यापारिक और सैन्य बंदरगाहों को पूरी तरह ठप करने की क्षमता रखता है। यह बढ़ा हुआ सैन्य दबाव तब आया है जब पाकिस्तान में हुई हाई-लेवल शांति वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि बातचीत में सबसे बड़ी बाधा तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा, "ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा। अगर वे डील पर राजी नहीं होते हैं, तो कभी कोई समझौता नहीं होगा।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के संवर्धित यूरेनियम को वापस लेकर ही दम लेगा। पिछले हफ्ते घोषित दो हफ्ते का सीजफायर अब खत्म होने की कगार पर है। उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पुष्टि की है कि ईरान परमाणु हथियार छोड़ने के वादे से पीछे हट रहा है। जब ट्रंप से उनकी पुरानी धमकी (सभ्यता खत्म होने वाली बात) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने विस्तार से बताने से मना करते हुए सिर्फ इतना कहा, "मैं कमेंट नहीं करूँगा, लेकिन यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा।" हालांकि वर्तमान सैन्य कार्रवाई एकतरफा दिख रही है, लेकिन ट्रंप ने दावा किया है कि कई अन्य देश भी इस समुद्री नाकेबंदी में मदद की पेशकश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमें दूसरे देशों की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं।" अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की अधिक जानकारी जल्द ही सार्वजनिक की जा सकती है। फिलहाल, स्वेज नहर से लेकर मेडिटेरेनियन सागर तक अमेरिकी जहाजों की हलचल ने पूरे विश्व को चिंता में डाल दिया है।