कलियुग का श्रवण कुमार: मां की याद में बेटे ने बनवा डाला 'दक्षिण का ताजमहल',तमिलनाडु के थिरुवरुर में उमड़ रहा जनसैलाब
तमिलनाडु। दुनिया ने शाहजहाँ का मुमताज़ के लिए प्रेम तो देखा है, जिसने आगरा में सफेद संगमरमर से प्रेम की अमर इबारत लिखी। लेकिन आज के दौर में एक बेटे ने अपनी मां के प्रति अगाध श्रद्धा और प्रेम को प्रदर्शित करने के लिए तमिलनाडु की धरती पर 'मिनी ताजमहल' खड़ा कर दिया है। थिरुवरुर जिले के अम्मायाप्पन गांव में बना यह भव्य स्मारक इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे लोग अब 'दक्षिणी ताजमहल' के नाम से पुकार रहे हैं। इस अनोखे स्मारक का निर्माण चेन्नई के सफल व्यवसायी अमुरदीन (49) ने अपनी दिवंगत मां जेलानी बीवी की याद में करवाया है। अमुरदीन बताते हैं कि उनके पिता शेख दाऊद के निधन के बाद मां ने ही पूरे परिवार और चार बहनों को संभलकर बड़ा किया। साल 2020 में मां के देहांत ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। अमुरदीन अपनी मां के लिए कुछ ऐसा करना चाहते थे जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मां-बेटे के पवित्र प्रेम की मिसाल बने। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि से प्रेरणा लेते हुए अपनी पैतृक जमीन पर इस स्मारक की नींव रखी।
करीब एक एकड़ जमीन पर फैला यह स्मारक लगभग 8,000 वर्गफुट क्षेत्र में निर्मित है। इसकी भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमुरदीन ने इसे हूबहू ताजमहल की शैली में बनाने के लिए राजस्थान से विशेष सफेद संगमरमर मंगवाया। 46 फीट चौड़ी इस इमारत में ऊंची और आकर्षक मीनारें हैं, जो दूर से ही राहगीरों का मन मोह लेती हैं। जून 2022 में खुले इस परिसर में केवल दिखावा नहीं, बल्कि सेवा का भाव भी है। यहाँ एक भव्य मस्जिद, नमाज स्थल और एक मदरसा भी बनाया गया है जहाँ छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। भीषण गर्मी के बावजूद यहाँ पर्यटकों का तांता लगा हुआ है। छुट्टियों के कारण रोजाना हजारों लोग यहाँ पहुँच रहे हैं। स्मारक प्रबंधन की ओर से आगंतुकों के लिए मुफ्त छाछ, सुंडल और चिक्की की व्यवस्था की जा रही है। सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह स्मारक सभी धर्मों और समुदायों के लिए खुला है। लोग यहाँ आकर न केवल नक्काशी की प्रशंसा कर रहे हैं, बल्कि इस सोच को देखकर भावुक भी हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने आज तक ऐसी श्रद्धा नहीं देखी। एक ग्रामीण ने भावुक होते हुए कहा, "ताजमहल पत्नी के प्रेम का प्रतीक था, लेकिन यह स्मारक मां की ममता का मंदिर है।" अमुरदीन की इस पहल ने न केवल थिरुवरुर को पर्यटन के मानचित्र पर चमका दिया है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया है कि माता-पिता का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है।