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न्याय के 'सारथी' की सादगी: कार छोड़ साइकिल से कोर्ट पहुंचे प्रधान जिला जज, दिया पर्यावरण बचाने का संदेश

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 13, 2026 06:05 AM
The Simplicity of the 'Charioteer' of Justice: Principal District Judge Arrives at Court on a Bicycle, Leaving His Car Behind—Conveying a Message to Save the Environment

बिहार के औरंगाबाद जिले में बुधवार की सुबह एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने न केवल आम जनता को हैरान कर दिया, बल्कि सादगी और पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की। व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला जज राजीव रंजन कुमार अपनी लग्जरी सरकारी कार छोड़ साइकिल पर सवार होकर कोर्ट पहुंचे। उनके इस कदम ने पूरे शहर में चर्चा छेड़ दी है और लोगों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। सुबह करीब सात बजे प्रधान जिला जज राजीव रंजन कुमार अपने दानीबिगहा स्थित आवास से दो अंगरक्षकों के साथ साइकिल पर सवार होकर निकले। करीब दो किलोमीटर की दूरी तय कर वे व्यवहार न्यायालय पहुंचे। इस दौरान उनके साथ कोर्ट के नाजीर आत्मानंद राय समेत अन्य कर्मी भी साइकिल से साथ चल रहे थे। हैरानी की बात यह रही कि पुरानी जीटी रोड पर सफर के दौरान दर्जनों कारें और बाइकें उनके पास से गुजरीं, लेकिन अधिकांश लोगों को अंदाजा भी नहीं हुआ कि साधारण वेशभूषा में साइकिल चला रहे व्यक्ति जिले के सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी हैं। कर्मा मोड़ और ब्लॉक मोड़ के पास ट्रैफिक के बीच वे एक सामान्य नागरिक की तरह रुके और रास्ता साफ होने का इंतजार किया। जब जज साहब कोर्ट के मुख्य गेट पर पहुंचे, तो वहां तैनात सुरक्षाकर्मी उन्हें साइकिल पर देखकर अचानक चौकन्ने हो गए। आनन-फानन में गेट खोला गया। वहां तैनात एक पुलिसकर्मी ने बताया कि जज साहब हर दिन कार से आते हैं, लेकिन बुधवार को उन्हें साइकिल पर देखना सुखद आश्चर्य था। प्रधान जिला जज के साथ-साथ परिवार न्यायालय के न्यायाधीश अरुण कुमार भी साइकिल से न्यायालय पहुंचे, जिससे इस मुहिम को और मजबूती मिली। प्रधान जिला जज का यह कदम वीआईपी संस्कृति को दरकिनार कर सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देता है। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि बड़े पदों पर बैठे अधिकारी इस तरह के उदाहरण पेश करेंगे, तो समाज में सकारात्मक बदलाव निश्चित है।
 


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