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उत्तराखंड में बदला सरकारी बाबूगिरी का अंदाज: अब 'कर्मयोगी' पोर्टल से चमकेगी कर्मचारियों की परफॉर्मेंस

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 10, 2026 05:07 AM
The style of government bureaucracy in Uttarakhand has changed: Employees' performance will now shine through the 'Karmayogi' portal.

देहरादून। उत्तराखंड में अब सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के काम करने के ढर्रे में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। राज्य में सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) के पारंपरिक तरीके को पूरी तरह बदलते हुए अब इसे डिजिटल, व्यावहारिक और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के बाद, उत्तराखंड सरकार ने 'आई गॉट कर्मयोगी' (एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण) पोर्टल के तहत अपने कर्मचारियों को नए जमाने के अनुरूप ढालना शुरू कर दिया है। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर यह होगा कि अब सरकारी कर्मचारियों की ट्रेनिंग सिर्फ फाइलों और हाजिरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें अपनी कार्यकुशलता को साबित करना होगा।

उत्तराखंड के शहरी विकास विभाग ने इस नई गाइडलाइन के अनुरूप अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नए ट्रेनिंग सिस्टम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं। कर्मचारियों को लंबे-चौड़े भाषणों के बजाय छोटे-छोटे डिजिटल मॉड्यूल में कोर्स पूरे करने होंगे। हर मॉड्यूल के खत्म होने पर एक लाइव क्विज (प्रश्नोत्तरी) होगी। अंतिम परीक्षा अनिवार्य: पूरा कोर्स समाप्त होने के बाद कर्मचारियों को एक फाइनल एग्जाम (अंतिम परीक्षा) पास करनी होगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उन्होंने कोर्स को गंभीरता से समझा है। प्रशिक्षण में केवल किताबी नियम नहीं रटाए जाएंगे। इसमें वीडियो ट्यूटोरियल, वास्तविक केस स्टडी (प्रशासनिक मामलों के उदाहरण) और रोजमर्रा के सरकारी कामकाज से जुड़े व्यावहारिक अभ्यास शामिल किए गए हैं। इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा लाभ उत्तराखंड की आम जनता को मिलने वाला है। अब तक सरकारी विभागों में नई नीतियों और जटिल नियमों को समझने में कर्मचारियों को लंबा वक्त लगता था, जिससे आम लोगों के काम लटके रहते थे। प्रशासनिक सुधारों की इस कड़ी का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है। सरकार का मानना है कि 'आई गॉट कर्मयोगी' पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षित होने के बाद राज्य के कर्मचारी जनता की समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनेंगे, जिससे प्रदेश में सुशासन की नींव मजबूत होगी।


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