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सिस्टम की सख्ती ने तोड़ी इंसानियत की हदेंः 19,300 रुपये के लिए भाई ने कब्र खोदकर बहन का कंकाल उठाया! बैंक के बाहर दर्दनाक मंजर से दहल उठा हर कोई

editor
  • Awaaz Desk
  • April 29, 2026 05:04 AM
The system's strictness has broken all bounds of humanity: For 19,300 rupees, a brother exhumed his sister's skeleton! The harrowing scene outside the bank left everyone horrified.

नई दिल्ली। ओडिशा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। यहां केओंझार जिले से सिस्टम की सख्ती और कागजी नियमों के आगे एक गरीब इस कदर बेबस हुआ कि उसे अपनी मृत बहन का कंकाल ही सबूत के तौर पर बैंक तक लाना पड़ा। सिर्फ 19,300 के लिए भाई ने वो कदम उठाया, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल गया। मामला केओंझार जिले के पटना ब्लॉक के मल्लीपासि इलाके का है। यहां स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक के बाहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक व्यक्ति अपनी बहन के कंकाल को कंधे पर उठाकर बैंक पहुंचा। देखने वालों को यकीन ही नहीं हुआ कि कोई इंसान इतनी मजबूरी में ऐसा भी कर सकता है। 

दरअसल, डियानाली गांव के रहने वाले जीतू मुंडा की बहन कालरा मुंडा का मल्लीपासि स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक में खाता था, जिसमें 19,300 जमा थे। कालरा की दो महीने पहले मौत हो चुकी थी। उनका पति और इकलौती संतान भी पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे। ऐसे में जीतू ही उनके इकलौते जीवित रिश्तेदार बचा था। कुछ दिन पहले जीतू अपनी बहन के खाते से पैसे निकालने बैंक पहुंचे। वहां बैंक मैनेजर ने साफ कहा या तो खाताधारक को लेकर आइएए या फिर डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी वारिस होने का प्रमाण दीजिए। जीतू के पास न तो कोई दस्तावेज था और न ही इन प्रक्रियाओं की जानकारी। मजबूर होकर वह खाली हाथ लौट गए। बताया जाता है कि जीतू पढ़ा लिखा नहीं है, ऐसे में उसके लिए डेथ सर्टिफिकेट बनवाना, वारिस प्रमाण पत्र लेना किसी पहाड़ से कम नहीं था। कई बार बैंक के चक्कर काटने के बाद आखिरकार वो थक गया और सोमवार को उसने श्मशान पहुंचकर बहन की कब्र खोदी और उसके अवशेष निकाले। इसके बाद वह कंकाल को कपड़े में लपेटकर करीब 3 किलोमीटर पैदल और बैंक पहुंच गए। चिलचिलाती धूप में यह मंजर जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। जब बैंक के बाहर जीतू कंकाल के साथ खड़ा दिखा, तो लोग सन्न रह गए। कुछ ने सिर पकड़ लिया, तो कुछ का गुस्सा फूट पड़ा। मौके पर जुटे लोगों ने बैंक प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उनका कहना था कि बैंक चाहता तो गांव के सरपंच से सत्यापन कर सकता था, फील्ड विजिट कर सकता था या मानवीय आधार पर फैसला ले सकता था। घटना की सूचना मिलते ही पटना ब्लॉक की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने जीतू को समझाया और शांत कराया। 

इधर जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो बैंक के रीजनल मैनेजर सत्यव्रत नंदा ने बैंक की सफाई में कहा कि जीतू मुंडा नशे में थे और वे यह समझने में असमर्थ थे कि उन्हें अपनी बहन के अकाउंट से पैसे निकालने के लिए कानूनी वारिस होने के वैध कागजात पेश करने होंगे। बैंक कर्मचारियों से बहस करने के बाद वे बैंक से निकल गए और जब लौटे तो उनके पास कंकाल था। हमनें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जांच शुरू कर दी है।  मौजूदा स्थिति यह है कि जीतू मुंडा को उनकी बहन के अकाउंट में जमा लगभग 19 हजार रुपए लौटा दिए गए हैं, इसके साथ ही रेड क्रॉस की तरफ से उन्हें 20 हजार रुपए की अतिरिक्त सहायता राशि प्रदान की गई है।


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