उत्तराखंड हाईकोर्ट में सितारगंज चीनी मिल मामले में हुई सुनवाई! कर्मचारियों ने कहा- ना बकाया भुगतान मिला और ना ही हुआ समायोजन! कोर्ट ने सरकार को दिए अहम निर्देश
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में सहकारी समिति सितारगंज चीनी मिल को सरकार द्वारा पीपी मोड पर दिए जाने के बाद कर्मचारियों के देयकों का भुगतान न करने और उन्हें अन्य जगह समायोजित न करने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले को निस्तारित करते हुए औद्योगिक सचिव को कर्मचारियों के प्रत्यावेदन पर विचार करने के निर्देश जारी किए हैं। मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई। बता दें कि विपिन चंद पांडे व 39 अन्य कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि वे मृतक आश्रित कोटे के माध्यम से वर्ष 2012 में सितारगंज चीनी मिल में अपनी सेवाएं देते आए हैं। प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2017 में सितारगंज सहकारी समिति चीनी मिल को बंद कर इसे पीपी मोड़ पर दे दिया गया। मिल को पीपी मोड पर देने के बाद न तो उन्हें उनके देयकों का भुगतान किया गया और न ही उन्हें कहीं अन्य जगह समायोजित करने का विकल्प दिया गया। जो कि उत्तर प्रदेश औद्योगिक अधिनियम की धारा 6ॅ का उल्लंघन है। याचिका में कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय से प्रार्थना की है कि उन्हें देयकों का भुगतान करने के साथ ही समायोजन का अधिकार दिए जाने को लेकर प्रदेश सरकार को निर्देश जारी किए जाए। ठीक उसी तरह जिस प्रकार सरकार ने गदरपुर चीनी मिल को बन्द करते समय उसमें लगे कर्मचारियों को विकल्प दिया गया था।