• Home
  • News
  • The wave of the UCC, originating in Uttarakhand, has reached as far as Assam and the Bay of Bengal; the BJP's 'resolve' has reshaped the electoral landscape.

उत्तराखंड से चली यूसीसी की लहर,असम-बंगाल की खाड़ी तक पहुंची गूँज, भाजपा के 'संकल्प' ने बदला चुनावी समीकरण

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 05, 2026 08:05 AM
The wave of the UCC, originating in Uttarakhand, has reached as far as Assam and the Bay of Bengal; the BJP's 'resolve' has reshaped the electoral landscape.

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की धरती से अंकुरित हुई 'समान नागरिक संहिता' (यूसीसी) की धारा अब देश के पूर्वी छोर तक जा पहुँची है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य में लागू किया गया ऐतिहासिक यूसीसी मॉडल अब असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए 'आधार स्तंभ' बन गया है। हालिया चुनावों में भाजपा ने अपने संकल्प पत्रों के जरिए जिस तरह यूसीसी को प्रमुखता दी, उसने न केवल राजनीतिक पंडितों को चौंकाया, बल्कि मतदाताओं के ध्रुवीकरण में भी अहम भूमिका निभाई है।

बता दें कि 2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री धामी ने यूसीसी का जो दांव खेला था, वह आज राष्ट्रीय राजनीति की मुख्यधारा बन चुका है। आजादी के बाद उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। उत्तराखंड की इस सफलता ने गुजरात, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए एक ब्लूप्रिंट का काम किया है। गुजरात पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुका है, जबकि असम और बंगाल के चुनावों में यह भाजपा का 'ट्रम्प कार्ड' साबित हुआ।भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में स्पष्ट किया है कि सत्ता में आने पर वह समान नागरिक संहिता को प्राथमिकता के आधार पर लागू करेगी। यहाँ भाजपा ने यूसीसी के साथ-साथ 'लव जेहाद' और 'लैंड जेहाद' के खिलाफ कड़े कानून बनाने का संकल्प लिया है। बंगाल के रण में भी भाजपा ने यूसीसी के जरिए तुष्टिकरण की राजनीति को चुनौती दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में 'लैंड जेहाद' के खिलाफ चल रहे सरकारी अभियान और सख्त भू-कानून ने अन्य राज्यों के मतदाताओं को काफी प्रभावित किया है। बंगाल समेत तीन राज्यों के हालिया चुनावी नतीजों ने उत्तराखंड भाजपा के भीतर नया जोश भर दिया है। सोमवार को जीत के जश्न के दौरान भाजपा नेताओं के तेवर बदले हुए नजर आए। अब पार्टी केवल 2027 के विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि नेताओं ने 2029 के लोकसभा और 2032 के विधानसभा चुनाव की रणनीति पर अभी से बात करना शुरू कर दिया है। नेताओं का दावा है कि यूसीसी ने देश की राजनीति का नैरेटिव बदल दिया है। उत्तराखंड से शुरू हुई यह सुधार की यात्रा अब रुकने वाली नहीं है। यह जीत संकेत है कि 2027 में भाजपा की 'हैट्रिक' की राह अब और भी आसान हो गई है। आजादी के अमृत काल में उत्तराखंड का यूसीसी कानून अब अन्य राज्यों के लिए कानूनी आधार बनेगा। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बना यह कानून अब राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता की ओर बढ़ता दिख रहा है। उत्तराखंड भाजपा मानकर चल रही है कि 'धामी मॉडल' की यह स्वीकार्यता उसे आगामी दशकों तक अजेय बनाए रखेगी।
 


संबंधित आलेख: