नदियों पर 'तीसरी आंख' का पहरा: बिहार में बनेगी नई हाईटेक वाटर पॉलिसी,सेंसर और डिजिटल सिस्टम से होगी मॉनिटरिंग,सम्राट सरकार का मेगा प्लान
पटना। बिहार सरकार राज्य के बेशकीमती जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, गिरते भूजल स्तर को सुधारने और विनाशकारी बाढ़ व सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और क्रांतिकारी 'नई जल नीति' लाने की तैयारी में है। इस नई नीति के तहत बिहार की तमाम छोटी-बड़ी नदियों की निगरानी अब पारंपरिक तरीकों से नहीं, बल्कि पूरी तरह से 'डिजिटल' और हाईटेक तकनीक के जरिए होगी। सम्राट सरकार के इस मेगा प्लान के तहत राज्य में एक नई 'वाटर अथॉरिटी' के गठन पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जो जल परियोजनाओं को रफ्तार देने का काम करेगी।
नई जल नीति का सबसे मजबूत स्तंभ इसका डिजिटल और आधुनिक तकनीकी ढांचा है। सरकार का लक्ष्य जल प्रबंधन को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाना है। इसके तहत नदियों के जलस्तर, प्रवाह और पानी की गुणवत्ता की चौबीसों घंटे निगरानी और रिपोर्टिंग आधुनिक डिजिटल सिस्टम से की जाएगी। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि राज्य में बाढ़ और सूखे की स्थिति का हफ्तों पहले ही बिल्कुल सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा। समय से पहले सटीक इनपुट मिलने से प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों की तैयारी का पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे हर साल होने वाले जान-माल के भारी नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार वर्तमान में काम कर रही तमाम जल संसाधन संस्थाओं के कामकाज की समीक्षा कर रही है। व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय (जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग) के सहयोग से एक व्यापक 'स्टेट वाटर रिसोर्स रिफॉर्म फ्रेमवर्क' तैयार किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक नीति की रूपरेखा तय करने के लिए मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विशेष समिति का गठन किया गया है। इस समिति की सबसे खास बात यह है कि इसमें जल संसाधन के साथ-साथ कृषि, पर्यावरण, नगर विकास, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, ग्रामीण विकास और लघु जल संसाधन विभाग के आला अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि पानी से जुड़े हर क्षेत्र की जरूरतों को एक सूत्र में पिरोया जा सके। नई व्यवस्था के तहत राज्य के बड़े बांधों और जलाशयों में अत्याधुनिक सेंसर आधारित डिजिटल मीटर लगाए जाएंगे। इससे पानी के भंडारण और निकासी का रीयल-टाइम डेटा मिल सकेगा। इसके अलावा, पुराने और आउटडेटेड हो चुके जल कानूनों को आज के समय और तकनीकी जरूरतों के अनुसार अपग्रेड करने की भी पूरी तैयारी है। नदी और भूजल से जुड़े आंकड़ों को पूरी तरह सटीक और उपयोगी बनाया जाएगा ताकि भविष्य की योजनाएं बिना किसी चूक के बनाई जा सकें। इस नई नीति के केंद्र में बिहार के किसान और कृषि व्यवस्था है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य की नहरों के जरिए सिंचाई के लिए पानी का वितरण बेहद संतुलित और प्रभावी तरीके से किया जाएगा। आधुनिक तकनीक की मदद से नहरों में होने वाली पानी की बर्बादी को पूरी तरह से रोका जाएगा, जिससे टेल एंड (नहर के अंतिम छोर) पर मौजूद किसान के खेतों तक भी समय पर और पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंच सकेगा। कृषि के साथ-साथ राज्य की औद्योगिक इकाइयों और तेजी से बढ़ते शहरी इलाकों के लिए भी पीने और उपयोग के पानी की संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का दृढ़ विश्वास है कि इस क्रांतिकारी नीति के धरातल पर उतरने के बाद बिहार जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में देश का सबसे आधुनिक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राज्य बनकर उभरेगा।