बिहार में विधायकों और अफसरों से बदसलूकी करने वालों की अब खैर नहीं, विधानसभा में खुला देश का पहला 'विशेषाधिकार न्यायालय'
पटना। बिहार विधानसभा परिसर में विधायकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के मान-सम्मान, गरिमा और उनके विधायी अधिकारों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। विधानसभा के उपभवन में नवनिर्मित 'विशेषाधिकार न्यायालय' का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने इस विशेष और अनूठे न्यायालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर अध्यक्ष ने दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि सदन या उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों का हनन करने वालों को अब किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या किसी भी व्यक्ति पर नियमानुसार तत्काल और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस ऐतिहासिक पहल के संबंध में जानकारी देते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-194 के तहत विधानसभा, उसके माननीय सदस्यों और विभिन्न समितियों को विशेष अधिकार और शक्तियां प्राप्त हैं। उन्होंने कहा, "अक्सर जमीन पर विधायकों या सदन के कर्मियों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बदसलूकी या उनके अधिकारों के हनन के मामले सामने आते रहते हैं। अब ऐसे सभी मामलों की त्वरित और प्रभावी सुनवाई इसी विशेष न्यायालय में की जाएगी।" इस कोर्ट में विधायकों के साथ-साथ विधानसभा के अधिकारियों और कर्मचारियों की शिकायतों का भी तेजी से निपटारा होगा। इस न्यायालय की सबसे बड़ी खासियत इसकी निरंतरता होगी। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस विशेषाधिकार न्यायालय की कार्यप्रणाली केवल विधानसभा के सत्र चलने तक ही सीमित नहीं रहेगी। साल के किसी भी दिन यदि विशेषाधिकार हनन या दुर्व्यवहार का कोई भी मामला सामने आता है, तो यह कोर्ट सक्रिय हो जाएगी और पूरी निष्पक्षता से मामले की जांच कर फैसला सुनाएगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से कार्यपालिका और विधायिका के बीच समन्वय, अनुशासन और एक-दूसरे के प्रति सम्मान को और अधिक बल मिलेगा।विधानसभा उपभवन में आयोजित इस गरिमामयी और ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान बिहार की विधायी व्यवस्था से जुड़े कई शीर्ष चेहरे मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह में बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव और बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति तारकिशोर प्रसाद समेत सदन के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम में मौजूद सभी नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने सर्वसम्मति से इस पहल का स्वागत किया और इसे लोकतांत्रिक व विधायी व्यवस्था को धरातल पर मजबूत करने वाला एक मील का पत्थर बताया।