ट्रक ड्राइवर की बेटी बनेगी डॉक्टर: पेपर लीक का डिप्रेशन और गरीबी को मात दे दरभंगा की कायनात ने नीट में लहराया परचम
दरभंगा। अगर हौसलों में उड़ान हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो गरीबी और विपरीत परिस्थितियां भी आपका रास्ता नहीं रोक सकतीं।" इस कहावत को अक्षरशः सच कर दिखाया है दरभंगा की होनहार बेटी कायनात खानम ने। एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली और ट्रक ड्राइवर की बेटी कायनात ने देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट' में शानदार सफलता हासिल की है। पेपर लीक के कारण दोबारा परीक्षा देने के मानसिक तनाव (डिप्रेशन) और परिवार की तंगहाली को पीछे छोड़ते हुए कायनात अब डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने जा रही हैं। कायनात खानम ने इस बेहद चुनौतीपूर्ण री-नीट परीक्षा में 720 में से 593 अंक हासिल किए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी ऑल इंडिया रैंक 12,575 है, जबकि अपनी कैटेगरी में उन्होंने 1,407वीं रैंक प्राप्त कर दरभंगा सहित पूरे बिहार का नाम रोशन किया है। कायनात की इस सफलता से उनके परिवार और पूरे गांव में जश्न का माहौल है, और माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू हैं। अपनी इस कठिन यात्रा को याद करते हुए कायनात बताती हैं, "डॉक्टर बनना मेरा बचपन का सपना था। जब पहली बार परीक्षा हुई, तो मेरा स्कोर अच्छा था और मैं क्वालीफाई कर चुकी थी। लेकिन महज 10 दिनों के भीतर खबर आई कि पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द हो गई है और दोबारा परीक्षा (री-नीट) होगी। यह सुनते ही मैं बुरी तरह टूट गई थी और गहरे डिप्रेशन में चली गई थी कि क्या मैं दोबारा इस परीक्षा को पास कर पाऊंगी या नहीं। इस मुश्किल वक्त में उनके कोचिंग संस्थान 'ओमेगा' के सुमित सर ने उनका हाथ थामा। उन्होंने कायनात का हौसला बढ़ाते हुए कहा, "तुम यह कर सकती हो, बस एक बार और हिम्मत जुटाओ।" शिक्षक के कहने पर कायनात संस्थान के हॉस्टल में शिफ्ट हो गईं और बिना पीछे मुड़े दोबारा तैयारी में जुट गईं।
री-नीट की तैयारी का सफर आसान नहीं था। कायनात बताती हैं कि उनके शिक्षक जानबूझकर बेहद कठिन टेस्ट पेपर तैयार करते थे। कई बार टेस्ट में नंबर कम आने पर वे रोने लगती थीं, लेकिन यही कठिन मॉक टेस्ट उनके लिए वरदान साबित हुए। उन्होंने परीक्षा को पास करने के लिए दिन-रात एक कर दिया। वे रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई करती थीं। देर रात 2 बजे तक किताबों के साथ जागना और सुबह 10 बजे उठकर फिर से पढ़ाई में जुट जाना—यही उनका रोज का नियम बन गया था। कायनात मूल रूप से दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव मोरवारा की रहने वाली हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा पश्चिम बंगाल में उनके नाना-नानी के घर पर रहकर हुई थी। लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान जब देश में लॉकडाउन लगा, तो वे अपने गांव मोरवारा लौट आईं। गांव में ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान नेटवर्क की भारी समस्या आ रही थी, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित हो रही थी। बेटी की पढ़ाई के प्रति लगन को देखते हुए उनके पिता ने बड़ा फैसला लिया और वे दरभंगा शहर के रहमगंज में एक कमरा किराए पर लेकर रहने लगे। कायनात का मानना है कि ऑनलाइन से बेहतर ऑफलाइन पढ़ाई होती है, क्योंकि वहां शिक्षकों से सीधा संवाद हो पाता है। एक बार असफलता मिलने पर माता-पिता ने पढ़ाई छुड़ाने का मन भी बना लिया था, लेकिन शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उन्हें संभाला। कायनात के पिता इम्तियाज अहमद खान पेशे से ट्रक ड्राइवर हैं। अपनी सीमित और अनिश्चित कमाई में पूरे परिवार को संभालना और बेटी की महंगी पढ़ाई का खर्च उठाना उनके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। भावुक होते हुए पिता इम्तियाज अहमद ने कहा आप सब जानते हैं कि एक ट्रक ड्राइवर की जिंदगी कैसी होती है। कम पैसें कमाना, फिर शहर में रूम रेंट देना, राशन का खर्च और बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाना बेहद कठिन था। लेकिन आज मेरी बेटी ने हमारी सारी थकान और गरीबी का दर्द मिटा दिया। मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मेरी बेटी डॉक्टर बनकर गरीब और असहाय लोगों की मुफ्त सेवा करेगी। कायनात ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के त्याग, उनकी दुआओं और अपने मार्गदर्शक सुमित सर को दिया है, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बनाए रखा।