पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार की 'ट्रिपल-डी' नीति से हड़कंप: भारत छोड़ बांग्लादेश भागने लगे घुसपैठिए, बॉर्डर पर लगी भारी भीड़
पश्चिम बंगाल में नवगठित भाजपा सरकार की 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' नीति का जमीन पर अभूतपूर्व और बड़ा असर दिखना शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करने के बाद, राज्य में सालों से अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों में हड़कंप मच गया है। हालात यह हैं कि अब ये अवैध प्रवासी खुद ही बोरिया-बिस्तर समेटकर वापस बांग्लादेश लौटने को मजबूर हो रहे हैं, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अचानक भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर सीमावर्ती इलाकों का एक वीडियो साझा कर इस बड़े बदलाव का दावा किया है। पार्टी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर सीमा क्षेत्र सैकड़ों की तादाद में लोग एक बार फिर इकट्ठा हो गए हैं, जो वापस बांग्लादेश जाने की फिराक में हैं। वीडियो जारी करते हुए भाजपा ने लिखा कि जब देश में 'एसआईआर' प्रक्रिया की सुगबुगाहट शुरू हुई थी, तब भी सीमा पर ऐसे ही दृश्य देखने को मिले थे। अब राज्य में होल्डिंग सेंटर खुलने और अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ भाजपा सरकार की चौतरफा सख्ती के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रवासियों के वापस भागने की होड़ मच गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉर्डर पर जुटे ये लोग पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों और अंदरूनी इलाकों में अवैध रूप से पहचान छिपाकर रह रहे थे। लेकिन राज्य की सत्ता बदलते ही सरकार ने इन्हें चिन्हित कर बाहर निकालने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में मालदा जिले में एक अत्याधुनिक 'होल्डिंग सेंटर' का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है। इस सेंटर में पकड़े गए अवैध प्रवासियों को तब तक हिरासत में रखा जाएगा, जब तक उनके कागजी दस्तावेज पूरे कर उन्हें वापस उनके देश डिपोर्ट (देश निकाला) नहीं कर दिया जाता। हाल ही में एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध प्रवासियों को लेकर सरकार के इरादे पूरी तरह साफ कर दिए थे। उन्होंने सख्त लहजे में कहा था कि जो भी लोग नागरिकता संशोधन कानून के तय दायरे और नियमों से बाहर पाए जाएंगे, उन्हें सीधे तौर पर 'अवैध घुसपैठिया' माना जाएगा। ऐसे तत्वों को चिन्हित कर तुरंत हिरासत में लिया जाएगा और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सीमा सुरक्षा बल के सुपुर्द कर दिया जाएगा। सरकार की इसी कड़ी चेतावनी और एक्शन प्लान के चलते अब घुसपैठियों के पैर उखड़ने लगे हैं।