कचहरी के बाहर संग्राम: वकीलों के अवैध चैंबरों पर चला बुलडोजर, हंगामा बढ़ने पर पुलिस का लाठीचार्ज,पीएसी तैनात
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को उस समय भारी बवाल और अफरा-तफरी मच गया, जब माननीय हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम ने स्वास्थ्य भवन और जिला कचहरी के आसपास बने वकीलों के अवैध चैंबरों को बुलडोजर से ढहाना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई के विरोध में सैकड़ों की संख्या में वकील सड़कों पर उतर आए और जमकर नारेबाजी की। देखते ही देखते पुलिस और वकीलों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। हंगामा और प्रदर्शन उग्र होने पर पुलिस ने वकीलों पर लाठीचार्ज कर दिया, जिससे मौके पर भारी तनाव फैल गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरे इलाके में भारी पुलिस बल के साथ पीएसी (PAC) तैनात कर दी गई है।
बुलडोजर की इस कार्रवाई के दौरान कोर्ट परिसर के बाहर उस समय हड़कंप मच गया, जब एक वकील ने प्रशासन पर बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप लगाते हुए खुद को अपने चैंबर के भीतर बंद कर लिया। वकील का कहना था कि उन्हें अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं दिया गया। गुस्से और तनाव में आकर उक्त वकील ने चैंबर के अंदर ही फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की, हालांकि मौके पर मौजूद मुस्तैद पुलिसकर्मियों और अन्य वकीलों ने तत्परता दिखाते हुए उसे ऐसा करने से रोक लिया। इस दौरान एक महिला वकील ने आरोप लगाते हुए कहा, "प्रशासन ने कुछ लोगों की मिलीभगत से गलत कार्रवाई की है। जिन 72 चैंबर्स की पहचान कर गिराने का आदेश था, उन्हें छूने के बजाय आम और गरीब वकीलों के चैंबर्स हटा दिए गए, जिन पर कोई निशान भी नहीं था। हमारे बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य भवन, सदर तहसील, निबंधन कार्यालय और कचहरी के आसपास फुटपाथों व नाले-नालियों पर बने करीब 240 अवैध चैंबरों को तोड़ने का सख्त आदेश दिया था। इसके बाद नगर निगम ने बाकायदा नोटिस चस्पा कर वकीलों को खुद ही अवैध कब्जे हटाने का समय दिया था। मियाद पूरी होने के बावजूद जब चैंबर नहीं हटाए गए, तब रविवार सुबह भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर अभियान शुरू किया गया। मुख्य रूप से स्वास्थ्य भवन चौराहे से चकबस्त चौराहे की सड़क, रेजिडेंसी से सीएमओ कार्यालय और जिला सत्र न्यायालय की ओर जाने वाली सड़कों को आज पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया गया। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, सड़क, फुटपाथ और सार्वजनिक नालों पर चैंबर और फोटोकॉपी की दुकानें बनाने वालों में कई प्रभावशाली लोग शामिल हैं। हालांकि, कार्रवाई की भनक लगते ही कुछ वकीलों ने पहले ही अपना कब्जा छोड़ दिया था। गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में भी नगर निगम ने यहां 20 अवैध चैंबर तोड़े थे, लेकिन रसूख के बल पर उन्हें दोबारा बना लिया गया था। प्रशासन ने साफ किया है कि कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन कराया जाएगा और किसी भी तरह का अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।