उदयपुर टेलर हत्याकाण्डः एक शिकायत पर कन्हैयालाल को गिरफ्तार करने वाली पुलिस पर उठ रहे सवाल! धमकी देने वालों पर मेहरबानी क्यों, लिंक में पढ़ें 11 से 28 का घटनाक्रम
राजस्थान के उदयपुर में दिनदहाड़े हुई टेलर की निर्मम हत्या नेे पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। आज सुबह कन्हैयालाल के शव का पोस्टमार्टम कर लिया गया है। कन्हैयालाल के घर पर इस समय भारी संख्या में लोग मौजूद हैं और खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है।
इस घटना से जहां देश सन्न है वहीं कन्हैयालाल की हत्या के बाद राजस्थान पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जाता है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत जून के पहले हफ्ते में हुई थी जब कन्हैयालाल के मोबाइल से नूपुर शर्मा के समर्थन में गलती से एक पोस्ट हो गयी थी इसके बाद कन्हैयालाल का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। 11 जून को कन्हैयालाल के पड़ोसी नाजिम ने कन्हैयालाल के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिसके बाद तत्परता दिखाते हुए वहां की पुलिस ने कन्हैयालाल को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि बाद में कोर्ट ने कन्हैयालाल को जमानत दे दी थी, लेकिन इसके बाद भी कन्हैयालाल को लगातार धमकियां मिल रही थीं। अलग-अलग नंबरों से फोन और मैसेज के जरिए जान से मारने की धमकी दी जाने लगी।
खुद की जान पर खतरे को देखते हुए कन्हैया 15 जून को उसी थाने में शिकायत और गुहार लेकर पहुंचा, जहां की पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। उसने धमकियों की जानकारी देते हुए अपनी जान की रक्षा की गुहार लगाते हुए सुरक्षा की मांग की, लेकिन कन्हैयालाल को गिरफ्तार करने में जरा भी देरी न करने वाली पुलिस ने धमकी देने वालों पर मेहरबानी दिखाई। पुलिस द्वारा न तो कन्हैयालाल को सुरक्षा मुहैय्या कराई गयी और न ही धमकी देने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही की गयी। नतीजा ये रहा कि धमकी देने वालों के हौंसले बुलंद हो गए और कल मोहम्मद गौस और रियाज नाम के आरोपियों ने दिनदहाड़े कन्हैयालाल की गला काटकर निर्मम हत्या कर दी।
सवाल यह भी उठता है कि एक शिकायत पर कन्हैयालाल को गिरफ्तार करने वाली पुलिस आखिर धमकी देने वालों पर क्यों मेहरबान थी। बताया जाता है कि जब कन्हैयालाल धमकी वाले मामले को लेकर पुलिस के पास पहुंचा तो पुलिस ने कुछ लोगों को थाने में बुलाकर भाईचारे से रहने का उपदेश देकर घ भेज दिया था। आखिर पुलिस ने सिर कलम करने की धमकी को इतने हल्के में क्या लिया इसपर भी सवाल उठने लाजिमी हैं।