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गुजरात में समान नागरिक संहिता को राष्ट्रपति की मंजूरी,उत्तराखंड के बाद लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बना

editor
  • Tapas Vishwas
  • October 02, 2026 01:10 PM
Uniform Civil Code in Gujarat receives Presidential assent; it becomes the second state in the country to implement it after Uttarakhand.

नई दिल्ली। देश में कानून व्यवस्था और सामाजिक समानता की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक मोड़ आया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक 2026' को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। राष्ट्रपति की मुहर लगते ही राज्य सरकार ने इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना भी जारी कर दी है। इसके साथ ही देवभूमि उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का ऐसा दूसरा राज्य बन गया है, जहाँ समान नागरिक संहिता कानून लागू होने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस विधेयक को गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में सर्वसम्मति से पारित किया था।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी ) को लेकर गुजरात ने एक अहम संवैधानिक पड़ाव पार कर लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद गुजरात में यूसीसी को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मार्च 2026 में गुजरात विधानसभा से पारित विधेयक को अब राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल चुकी है। इसके साथ गुजरात, उत्तराखंड के बाद यूसीसी  विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी पाने वाला दूसरा राज्य बन गया है। केंद्र सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, गुजरात विधानसभा ने मार्च में यूसीसी  विधेयक पारित किया था। गुजरात का यूसीसी  विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत कानून से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी ढांचा निर्धारित करने की दिशा में है। इसका प्रभाव अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कई मामलों पर पड़ सकता है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब राज्य में इसके प्रावधानों को लागू करने से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रस्तावित व्यवस्था में विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है। यानी विवाह होने के बाद उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज कराना होगा। इसी तरह लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य विवाह और पारिवारिक संबंधों से जुड़े मामलों का औपचारिक रिकॉर्ड तैयार करना है। यूसीसी में विवाह और तलाक के मामलों के लिए एक समान कानूनी प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। इसमें एकविवाह की व्यवस्था भी शामिल है। इसके तहत पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने पर रोक रहेगी। गुजरात यूसीसी के महत्वपूर्ण प्रावधानों में उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों में बेटे और बेटी के बीच समानता शामिल है। पैतृक और अन्य उत्तराधिकार संबंधी मामलों में बेटियों को भी बेटों के समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है। बिना वसीयत किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में उसके जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के अधिकारों को भी कानून के तहत निर्धारित करने का प्रावधान है। इस व्यवस्था से संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े विवादों के लिए एक समान कानूनी ढांचा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े बच्चों के अधिकारों को भी कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान है। इसके अलावा सरोगेसी और गोद लिए गए बच्चों के अधिकारों के मामले में भी समान कानूनी सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। इस तरह कानून का दायरा केवल विवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और उत्तराधिकार से जुड़े विभिन्न संबंधों को भी इसमें शामिल किया गया है। गुजरात के यूसीसी  में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को कुछ प्रावधानों से छूट दी गई है। इसके पीछे आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और वैवाहिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखने की बात कही गई है। यानी राज्य में यूसीसी का ढांचा लागू होने के बावजूद कुछ जनजातीय समुदायों की पारंपरिक व्यवस्थाओं के लिए अलग प्रावधान रखे गए हैं। उत्तराखंड ने 27 जनवरी 2025 कोयूसीसी लागू किया था और वह देश का पहला राज्य बना था जिसने इसे अपने यहां लागू किया। अब गुजरात विधानसभा से विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बादयूसीसी को लेकर देश में दूसरा राज्य जुड़ गया है। केंद्र सरकार ने गुजरात विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद इसे उत्तराखंड के बाद यूसीसी  की दिशा में दूसरा राज्य कदम बताया था। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब गुजरात में कानून के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए नियम, पंजीकरण व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामलों में राज्य के नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था का नया ढांचा तैयार होगा।


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