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डीजीपी से नाराज वित्त मंत्री का बड़ा एक्शन,पूरी सुरक्षा और कारकेड की गाड़ियां लौटाईं, बोले-अब ऊपर वाले पर ही भरोसा 

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 03, 2026 01:07 PM
Upset with the DGP, the Finance Minister took drastic action by returning his entire security detail and convoy vehicles, stating, "Now, I place my trust only in the Almighty."

रांची। झारखंड के सियासी और प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐसा अभूतपूर्व कदम उठाया है, जिसने सरकार से लेकर पुलिस महकमे तक में हड़कंप मचा दिया है। डीजीपी  कार्यालय के रवैये से बेहद नाराज वित्त मंत्री ने अपने साथ तैनात सभी सुरक्षा गार्डों को वापस भेज दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने वीआईपी सुरक्षा के तहत मिलीं कारकेड की तीनों बोलेरो गाड़ियां भी पुलिस मुख्यालय को लौटा दी हैं।इस बड़े फैसले के बाद जब मंत्री जी से उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा "मुझे अब सिर्फ ऊपर वाले पर पूरा भरोसा है। इस पूरे विवाद की जड़ में प्रशासनिक संवादहीनता और एक नोटिस है। दरअसल, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बीते 29 जून को पुलिस महानिदेशक को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात 16 सुरक्षाकर्मियों के आवागमन में होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला देते हुए एक अतिरिक्त वाहन (गाड़ी) उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

मंत्री के पत्र पर डीजीपी कार्यालय ने कोई सकारात्मक कदम तो नहीं उठाया, बल्कि इसके उलट खेल हो गया। कुछ ही दिनों बाद वित्त विभाग के संयुक्त सचिव ने डीजीपी कार्यालय के एक पुराने पत्र का हवाला देते हुए वित्त मंत्री के आप्त सचिव (निटिज सचिव) को एक नोटिस थमा दिया। इस नोटिस में मंत्री की सुरक्षा में पहले से शामिल एक वाहन को तुरंत पुलिस मुख्यालय वापस करने का आदेश था। मांगने गए थे अतिरिक्त गाड़ी, मिल गया पहले से मौजूद गाड़ी भी छीनने का नोटिस!" इसी बात से आहत और नाराज होकर वित्त मंत्री ने आधी-अधूरी सुरक्षा रखने के बजाय अपनी पूरी वीआईपी सिक्योरिटी ही सरेंडर करने का कड़ा फैसला ले लिया। सुरक्षा छोड़ते ही राज्य की राजनीति में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। हालांकि, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने खुद इस कदम की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि इस विवाद का मुख्यमंत्री से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा यह पूरा मामला सीधे तौर पर मेरे, वित्त विभाग और पुलिस विभाग के बीच का है। मैं पहले भी विकट दौर में बूढ़ा पहाड़ जैसे धुर नक्सल प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में बिना किसी सुरक्षा के जाता रहा हूं। इसलिए मुझे सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है, भगवान पर भरोसा है। वित्त मंत्री के इस कड़े रुख के बाद झारखंड की सियासत में नई बहस छिड़ गई है। सत्ता पक्ष के भीतर मंत्रियों और अधिकारियों के बीच समन्वय (तालमेल) की कमी को लेकर विपक्ष को भी एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब कैबिनेट मंत्री स्तर के नेता की चिट्ठी पर डीजीपी कार्यालय का यह रवैया है, तो आम जनता की क्या सुनवाई होती होगी? फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल मामले पर पुलिस मुख्यालय या डीजीपी कार्यालय की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राधाकृष्ण किशोर पहले भी अपने कड़े नीतिगत फैसलों और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं, लेकिन सुरक्षा लौटाने के इस फैसले ने सरकार के भीतर चल रही प्रशासनिक खींचतान को पूरी तरह सड़क पर ला दिया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री इस मामले में क्या हस्तक्षेप करते हैं।
 


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