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अमेरिका-ईरान तनाव का असर उत्तराखंड पर, परिवहन निगम की 59 बसों की खरीद अटकी; निर्माता कंपनी ने बढ़ाई कीमतें

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 15, 2026 07:07 AM
US-Iran tensions impact Uttarakhand; procurement of 59 Transport Corporation buses stalled as manufacturer hikes prices.

देहरादून। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब उत्तराखंड की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए बस निर्माता कंपनी ने उत्तराखंड परिवहन निगम को पहले तय कीमत पर बसें देने से इनकार कर दिया है। इसके चलते निगम की 59 नई बसों की खरीद प्रक्रिया फिलहाल अधर में लटक गई है।

जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड परिवहन निगम ने पिछले वर्ष जुलाई में 100 बसों की खरीद के लिए टाटा कंपनी के साथ समझौता किया था। उस समय प्रति बस कीमत 35.35 लाख रुपये तय की गई थी और इसके लिए परचेज ऑर्डर (पीओ) भी जारी कर दिया गया था। बाद में सितंबर में केंद्र सरकार ने बसों पर लागू जीएसटी की दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी। टैक्स में कमी आने से प्रति बस करीब 2.77 लाख रुपये की बचत हुई, जिसके आधार पर कंपनी ने उसी राशि में नौ अतिरिक्त बसें देने का प्रस्ताव रखा था। इसी बीच राज्य सरकार की कैबिनेट ने पर्वतीय मार्गों के लिए 50 नई बसें खरीदने को भी मंजूरी दी। इन बसों की अनुमानित कीमत 32.58 लाख रुपये प्रति बस तय की गई थी। लेकिन अब कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के कारण कच्चे माल की लागत बढ़ने का हवाला देते हुए नई कीमत 36 लाख रुपये प्रति बस कर दी है। इससे कुल 59 बसों (नौ अतिरिक्त और 50 नई बसें) की खरीद पर संकट खड़ा हो गया है। परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार, कंपनी के साथ लगातार बातचीत की जा रही है ताकि पहले तय शर्तों के अनुसार बसों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। निगम ने निर्माता कंपनी से जल्द लिखित जवाब भी मांगा है। यदि कीमतों को लेकर सहमति नहीं बनती है तो अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। उत्तराखंड परिवहन निगम के लिए यह खरीद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में बसों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है। नई बसों के शामिल होने से यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद थी। यदि खरीद प्रक्रिया में और देरी होती है तो इसका सीधा असर पर्वतीय रूटों पर बस संचालन और यात्रियों की सुविधा पर पड़ सकता है। उत्तराखंड परिवहन निगम के महाप्रबंधक (संचालन) क्रांति सिंह ने बताया कि कंपनी ने खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध और कच्चे माल की बढ़ी लागत का हवाला देकर पुरानी दरों पर बसें देने से मना किया है। निगम इस मामले का समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अक्टूबर तक हर हाल में 59 बसों की खरीद प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संघर्षों का असर अब केवल तेल और ईंधन तक सीमित नहीं रह गया है। कच्चे माल, विनिर्माण और परिवहन क्षेत्र पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। उत्तराखंड परिवहन निगम की बस खरीद में आई यह अड़चन इसका ताजा उदाहरण है, जहां अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर सीधे राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है।
 


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