भारत-इक्वाडोर संबंधों में नए युग का सूत्रपात: सस्ती दवाइयों से लेकर डिजिटल क्रांति तक, कई ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर
नई दिल्ली। भारत की 'सॉफ्ट पावर' और आर्थिक बढ़त का लोहा अब लैटिन अमेरिकी देश भी मान रहे हैं। इक्वाडोर की विदेश मंत्री गैब्रिएला सोमरफेल्ड की हालिया भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। इस उच्च स्तरीय दौरे के दौरान स्वास्थ्य, व्यापार और डिजिटल तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े समझौते हुए हैं, जो भविष्य में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए गेमचेंजर साबित होंगे।
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र रहा। भारत ने इक्वाडोर को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। इक्वाडोर की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही, दोनों देशों ने जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा अनुसंधान में एक साथ काम करने पर सहमति जताई है। व्यापारिक मोर्चे पर दोनों देशों ने एक-दूसरे के पूरक बनने का संकल्प लिया है। इक्वाडोर ने भारतीय बाजारों में अपने प्रमुख उत्पादों जैसे केला, कोको और झींगा के लिए बेहतर पहुंच की मांग की है। इसके बदले में, भारत ने इक्वाडोर के विशाल ऊर्जा और खनन क्षेत्रों में निवेश करने की इच्छा जताई है। यह रणनीतिक निवेश न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि द्विपक्षीय व्यापार संतुलन को भी बेहतर बनाएगा। भारत की डिजिटल क्रांति से प्रभावित होकर इक्वाडोर ने अपनी प्रशासनिक और वित्तीय प्रणालियों को आधुनिक बनाने के लिए भारतीय विशेषज्ञता का लाभ उठाने की इच्छा जताई है। भारत ने अपने 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' के अनुभव साझा करने की पेशकश की है, जिससे इक्वाडोर में डिजिटल भुगतान और ई-गवर्नेंस को नई दिशा मिलेगी। केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों देशों ने एक सुर में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्री सोमरफेल्ड की इस यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लैटिन अमेरिका में भारत अब केवल एक व्यापारिक साझीदार नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी के रूप में उभर रहा है।