उत्तराखण्डः भारत रत्न गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती! नैनीताल और अल्मोड़ा में हुए कार्यक्रम
नैनीताल। भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती के अवसर पर नैनीताल समेत कई जगहों पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रशासक और राष्ट्रनिर्माता को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए गए। नैनीताल के पंत पार्क में आयोजित कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री एवं शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि पंडित पंत ने उत्तराखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे देश को दिशा देने और भारत को एकजुट करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। धन सिंह रावत ने कहा कि आज जरूरत है कि हम पंडित पंत के आदर्शों और विचारों को अपने जीवन में अपनाएं और राष्ट्रहित में समाज की सेवा के लिए तत्पर रहें। यही भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि पंत जी का जीवन संघर्ष, राष्ट्रसेवा और जनहित के लिए समर्पित रहा। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने इस मौके पर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक गांव के स्कूल में छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चार महीनों में सभी स्कूलों को जरूरी मूलभूत सुविधाओं से सुसज्जित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अल्मोड़ा और खूंट गांव में भी हुए कार्यक्रम
पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती पर अल्मोड़ा में नंदादेवी मंदिर से प्रभात फेरी निकाली गई। प्रभात फेरी पंडित गोविंद बल्लभ पंत पार्क पहुंची, जहां उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया। वहीं उनकी जन्मस्थली खूंट गांव में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी खूंट गांव में 10 सितंबर 1887 को पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जन्म हुआ था। जन्मस्थली पर आयोजित कार्यक्रम में स्कूली बच्चों और स्थानीय कलाकारों ने नृत्य, गायन और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने पंडित पंत के जीवन और राष्ट्र के लिए उनके योगदान को याद किया। पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा के रामजे स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद से कानून की पढ़ाई की और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। आजादी के बाद वह उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने और बाद में देश के गृह मंत्री का दायित्व संभाला। जयंती समारोह के दौरान लोगों ने उनके विचारों और आदर्शों को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि पंडित पंत का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और सामाजिक जिम्मेदारी की प्रेरणा देता रहेगा।