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उत्तराखण्डः 20 साल का इंतजार हुआ खत्म! पिथौरागढ़ निवासी संजय राम बरेली से भटककर पहुंचा थे नेपाल, श्रद्धा फाउंडेशन ने अपनों से मिलवाया

editor
  • Awaaz Desk
  • September 10, 2026 07:09 AM
Uttarakhand: A 20-year wait comes to an end! Sanjay Ram, a resident of Pithoragarh, had wandered from Bareilly into Nepal; the Shraddha Foundation reunited him with his family.

पिथौरागढ़। सड़कों पर भटक रहे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को उपचार और पुनर्वास के बाद उनके परिवारों तक पहुंचाने की मुहिम में श्रद्धा फाउंडेशन ने एक और परिवार को उसकी खुशियां लौटाई हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र निवासी संजय राम करीब 20 साल बाद अपने परिवार से मिल पाए। लंबे समय तक भटकने के बाद संजय नेपाल पहुंचे, जहां से उन्हें मुंबई के कर्जत स्थित श्रद्धा पुनर्वास केंद्र लाया गया। उपचार और पुनर्वास के बाद जब उन्होंने अपने गांव और परिवार के बारे में जानकारी दी तो संस्था ने उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाई। परिवार के मुताबिक संजय राम मूल रूप से गंगोलीहाट तहसील के जजुट गांव के रहने वाले हैं। करीब दो दशक पहले वह रोजगार के सिलसिले में बरेली गए थे और वहां एक पेट्रोल पंप पर काम करते थे। इसी दौरान उन्हें नशे की आदत लग गई और धीरे-धीरे उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। इसके बाद वह बरेली से निकल गए और भटकते हुए नेपाल पहुंच गए। लंबे समय तक परिवार को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। नेपाल के चितवन, भरतपुर स्थित मानव सेवा आश्रम के माध्यम से संजय को मुंबई के कर्जत स्थित श्रद्धा रिहैबिलिटेशन सेंटर लाया गया। यहां संस्था की देखरेख में उनका उपचार और पुनर्वास किया गया।

उपचार के बाद धीरे-धीरे उनकी मानसिक स्थिति में सुधार आया और उन्होंने अपने घर-गांव के बारे में जानकारी साझा की। इसके बाद श्रद्धा फाउंडेशन के सोशल वर्कर स्वरूप कुमार संजय को लेकर उत्तराखंड पहुंचे। उन्होंने गंगोलीहाट के जजुट गांव में संजय के परिवार की तलाश शुरू की। ग्राम पंचायत की प्रधान मंजू देवी ने भी परिवार का पता लगाने में मदद की। आखिरकार संजय के परिजनों से संपर्क हुआ तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। संजय के भाई ने बताया कि वह करीब 20 वर्षों से लापता थे। लंबे इंतजार के बाद भाई को सामने देखकर परिवार भावुक हो उठा। परिजनों ने संजय को वापस घर पहुंचाने के लिए श्रद्धा फाउंडेशन का आभार जताया। संस्था के सोशल वर्कर स्वरूप कुमार ने बताया कि श्रद्धा फाउंडेशन वर्ष 1988 से ऐसे लोगों के उपचार और पुनर्वास के लिए काम कर रही है। उनके मुताबिक अब तक संस्था करीब 14,500 लोगों को उपचार के बाद उनके परिवारों तक पहुंचा चुकी है। श्रद्धा फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. भरत वाटवानी और उनकी पत्नी स्मिता वाटवानी की देखरेख में चल रही इस पहल को सामाजिक सेवा के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान भी मिली है। डॉ. भरत वाटवानी को वर्ष 2018 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। संजय राम की घर वापसी एक परिवार के लिए लंबे इंतजार के खत्म होने की कहानी है, साथ ही यह दिखाती है कि उपचार, पुनर्वास और मानवीय प्रयास से वर्षों से बिछड़े लोगों को फिर उनके अपनों तक पहुंचाया जा सकता है।


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