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उत्तराखण्डः सात समंदर पार से उत्तराखंड खींच लाई पति की अंतिम इच्छा! जहां दोनों ने बिताए खास पल, वहीं प्रवाहित की अस्थियां

editor
  • Awaaz Desk
  • August 10, 2026 11:08 AM
Uttarakhand: A husband's final wish brought his wife all the way from across the seas to Uttarakhand; his ashes were immersed at the very place where the couple had shared special moments.

बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर में सरयू और गोमती के पवित्र संगम पर रविवार को एक ऐसा क्षण आया, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। सात समंदर पार जापान से बागेश्वर पहुंचीं मियाको केटलेट ने जब वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच अपने दिवंगत अमेरिकी पति रोबर्ट केटलेट की अस्थियां सरयू की पावन धारा में प्रवाहित कीं, तो सरयू तट एक अनूठे और अमिट प्रेम का गवाह बन गया। अमेरिका में जन्मे रोबर्ट और जापान की अंग्रेजी प्रोफेसर मियाको की प्रेम कहानी साल 2005 में जापान में एक साधना शिविर से शुरू हुई थी। वर्ष 2007 में दोनों ने जब बागेश्वर की शांत वादियों और आध्यात्मिक परिवेश को महसूस किया, तो रोबर्ट का इस पावन भूमि से एक ऐसा गहरा भावनात्मक रिश्ता जुड़ गया जो उनके अंतिम सांस तक कायम रहा। बाद में विवाह के बंधन में बंधकर जापान में हंसी-खुशी जीवन बिता रहे इस दंपत्ति पर 2022 में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब गंभीर बीमारी के चलते रोबर्ट का निधन हो गया। पति को खोने के गहरे सदमे के बीच भी मियाको को रोबर्ट की वह आखिरी ख्वाहिश याद रही, जो उन्होंने बागेश्वर की पवित्र भूमि के लिए जताई थी। अपने हमसफर के उसी अंतिम सपने को पूरा करने मियाको रविवार को रोबर्ट की अस्थियां लेकर बागेश्वर के समण मंदिर बिलौना पहुंचीं। अपने पारिवारिक पुजारी की उपस्थिति में पूरी हिंदू रीति-रिवाज और मंत्रोच्चारण के साथ मियाको ने अस्थि विसर्जन का कर्मकांड पूरा किया। सरयू की धारा में पति की अस्थियों के विलीन होने के साथ ही मियाको ने न सिर्फ रोबर्ट को एक भावुक अंतिम विदाई दी, बल्कि सरयू तट पर सच्चे प्रेम और अटूट समर्पण की एक अमर कहानी भी लिख दी।


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