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उत्तराखंड बोर्ड परिणाम: 73 प्रतिशत अंक आने पर भी छात्र ने की खुदकुशी की कोशिश, चंपावत में परीक्षा परिणाम के बाद मातम

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 25, 2026 12:04 PM
Uttarakhand Board Results: Student Attempts Suicide Despite Scoring 73 Percent; Gloom Descends on Champawat Following Exam Results

चंपावत। उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा के परिणामों ने जहाँ कई घरों में खुशियाँ बिखेरीं, वहीं चंपावत जिले के लोहाघाट से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। लोहाघाट के गुमदेश क्षेत्र में 10वीं के एक 16 वर्षीय छात्र ने परीक्षा में कम अंक आने से निराश होकर अपने घर के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। गनीमत रही कि पड़ोस की एक बच्ची ने सही समय पर देख लिया, जिससे समय रहते उसे फंदे से नीचे उतारा जा सका। फिलहाल छात्र की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

जानकारी के अनुसार, शनिवार को जैसे ही उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम घोषित किया, छात्र ने अपना रिजल्ट देखा। उसे परीक्षा में 73 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। एक सामान्य छात्र के लिए यह स्कोर सम्मानजनक माना जाता है, लेकिन उक्त छात्र इन अंकों से संतुष्ट नहीं था। अपनी उम्मीद से कम नंबर आने के कारण वह गहरे अवसाद में चला गया और कुछ ही देर बाद उसने घर के कमरे में फांसी का फंदा लगाकर जान देने की कोशिश की। घटना के वक्त पड़ोस में रहने वाली एक छोटी बच्ची अचानक छात्र के कमरे में आ गई। कमरे का नजारा देखते ही उसके होश उड़ गए और उसने तुरंत शोर मचाकर परिजनों को सूचित किया। परिजनों और ग्रामीणों ने आनन-फानन में छात्र को फंदे से नीचे उतारा और तत्काल लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय पहुँचाया। बताया जा रहा है कि तीन भाई-बहनों में यह छात्र सबसे छोटा है। उप जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विराज राठी और डॉ. हिमांशु सरन ने छात्र का प्राथमिक उपचार किया। डॉ. राठी ने बताया कि छात्र की हालत काफी गंभीर है। अस्पताल में ईएनटी सर्जन की उपलब्धता न होने के कारण छात्र को तत्काल चंपावत जिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया गया है। फिलहाल डॉक्टर उसे बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर सामाजिक और शैक्षिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 73 प्रतिशत जैसे अच्छे अंक आने के बावजूद एक किशोर का ऐसा कदम उठाना यह दर्शाता है कि बच्चों पर प्रदर्शन  का मानसिक दबाव किस कदर हावी है।
 


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