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तीन राज्यों में हार से उत्तराखंड कांग्रेस को भी झटका! पार्टी ने परिणामों को बताया अप्रत्याशित

editor
  • Tapas Vishwas
  • December 04, 2023 01:12 PM
Uttarakhand Congress also shocked by defeat in three states! The party called the results unexpected

उत्तराखंड कांग्रेस को देश के तीन प्रमुख राज्यों में मिली हार के बाद झटका लगा है। बीते वर्ष पड़ोसी राज्य हिमाचल के विस चुनाव में जीत की जो ऑक्सीजन मिली थी, इस हार ने उसे निराशा में बदल दिया है। निश्चित तौर पर वर्ष 2024 के लोस चुनावाें में इन परिणामों का असर देखने को मिलेगा।

पार्टी नेताओं की मानें तो इसके लिए उत्तराखंड कांग्रेस नए मनोयोग से बीते 10 सालों का सूखा खत्म करने के लिए मैदान में उतरेगी। उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटों टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार अल्मोड़ा और नैनीताल-ऊधमसिंह नगर में कांग्रेस बीते दो चुनावों (वर्ष 2014 और 2019) में एक भी सीट नहीं जीत पाई है। दोनों ही बार पांचों सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। इस बार भाजपा जहां पांचों सीटों पर हैट्रिक बनाने के इरादे से मैदान में उतरेगी, वहीं कांग्रेस को नए सिरे से कसरत करनी पड़ेगी। राजनीति के जानकारों की मानें तो इन राज्यों में हार और जीत का असर लोस चुनाव में स्पष्ट तौर पर देखने को मिलेगा। उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं रहेगा। वहीं पार्टी उपाध्यक्ष संगठन मथुरा दत्त जोशी की मानें तो लोकसभा और विधानसभ चुनाव के मुद्दे भिन्न होते हैं, ऐसे में इन चुनाव परिणामों का आगामी लोस चुनाव में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने इस हार को अप्रत्याशित बताया। कहा, उत्तराखंड में पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी और पांचों सीटों पर जीत दर्ज करेगी। छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विस चुनाव में उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन वह कोई बड़ा कमाल नहीं दिखा पाए। छत्तीसगढ़ में पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व सीएलपी लीडर प्रीतम सिंह को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। वहीं एक दिन पहले जीत की पूरी उम्मीद के साथ उन्हें कांग्रेस विधानमंडल की बैठक में समन्वय बनाने के लिए पर्यवेक्षक बनाया गया है। दूसरी तरफ राजस्थान में पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल को स्कीनिंग कमेटी में रखा गया था, वहीं वरिष्ठ नेता डॉ.हरक सिंह रावत को सह पर्यवेक्षक बनाया गया था। जबकि एआईसीसी के सचिव होने के नाते काजी निजामुद्दीन चुनाव से बहुत पले से वहां डटे हुए थे। एक राज्य में जीत और तीन राज्यों में हार के बाद प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय भवन में सन्नाटा छा गया। दोपहर से पहले मुख्यालय में कुछ कार्यकर्ता जुटने शुरू हुए थे, लेकिन जैसे-जैसे रुझान सामने आते गए, पार्टी कार्यकर्ता में एक-एक कर जाते रहे। देखते ही देखते पार्टी मुख्यालय में सन्नाटा छा गया। किसी बड़े नेता ने भी मुख्यालय का रुख नहीं किया।


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