उत्तराखण्डः जोशीमठ भू-धंसाव को लेकर मुख्यमंत्री धामी से मिले कांग्रेसी! मामले को लेकर सरकार से पूछे सवाल, ज्ञापन सौंपकर उठाई प्रमुख मांगे
देहरादून। जोशीमठ भू-धंसाव के मामले को लेकर कांग्रेसियों का शिष्टमण्डल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिला। इस दौरान सीएम धामी को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें कहा गया कि उत्तराखण्ड के सीमांत पर बसे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, पर्यटक नगर जोशीमठ के अस्तित्व के लिये और अपने जीवन व भविष्य के प्रति आशंकित लोगों का संघर्ष जारी है। एनटीपीसी और सरकार का बार-बार कहना है कि परियोजना की सुरंग जोशीमठ से दूर है। हमारा सवाल है कि बाईपास सुरंग कहां है? उसकी स्थिति जोशीमठ के नीचे ही है और वह विस्फोटों के जरिये ही बनी है। लोगों को आशंका है कि उसमें कुछ दिन पहले तक लगातार विस्फोट किये जा रहे थे जो जोशीमठ में आज हो रहे भू-धंसाव का मुख्य कारण हैं। शेष कारणों ने इस प्रक्रिया को तीव्र करने में योगदान किया है।
अब जब जोशीमठ के अधिकांश घरों में दरारें आ चुकी हैं और कुछ भूगर्भ वैज्ञानिकों ने भी जनता की ही तरह, बड़ी आपदा की आशंका व्यक्त की है। तब अपना जीवन, सम्पत्ति व भविष्य की सुरक्षा की चिंता ने जनता को पुनः सड़कों पर ला दिया है। यदि सरकार व प्रशासन समय रहते जनता की सुन लेते और कार्यवाही करते तो यह नौबत नहीं आती।
इस दौरान ज्ञापन में जोशीमठ नगर को बचाने हेतु जोशीमठ त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने, एनटीपीसी की परियोजना पर पूर्ण रोक की प्रक्रिया प्रारंभ करने, हेलंग-मारवाड़ी बाईपास पूर्णतया बन्द करने, एनटीपीसी को पूर्व में हुए 2010 के समझौते को लागू करने, जोशीमठ के समयबद्ध विस्थापन, पुनर्वास एवं स्थायीकरण के लिये जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति को शामिल करते हुए एक अधिकार प्राप्त उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करने, जोशीमठ में पीड़ितों की तत्काल आवास भोजन व अन्य सहायता हेतु एक समन्वय समिति बने जिसमें स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल करने, लोगों के घर मकानों का आंकलन करते हुए मुआवजा व उनके स्थाई पुनर्वास की प्रक्रिया तुरन्त प्रारंभ करने की मांग उठाई गयी। कहा गया कि राज्य सरकार इस आपदा की घड़ी में विशाल ह्रदय से, मानवीय दृष्टिकोण से पीड़ित जनता के हित मे सबको साथ लेकर चलते हुए कार्य करें। कहा गया कि सिर्फ प्रशासनिक मशीनरी के भरोसे इस बड़ी आपदा से नहीं निपटा जा सकता। पूर्व की आपदाओं का भी यही सबक है और मुख्य विपक्षी दल के नाते हम कंधे से कंधा मिलाकर चलने और सहयोग करने का प्रस्ताव पुनः दोहराते हैं। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा आदि मौजूद रहे।