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उत्तराखण्डः बदरीनाथ धाम में कल्चरल फेस्टिवल पर बढ़ा विवाद! डीएम ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर को भेजा नोटिस, मांगा जवाब

editor
  • Awaaz Desk
  • September 27, 2026 09:09 AM
Uttarakhand: Controversy escalates over cultural festival at Badrinath Dham; DM sends notice to Garhwal Scouts' Commanding Officer, seeks a response.

चमोली। बदरीनाथ धाम में आयोजित कल्चरल फेस्टिवल को लेकर उठे विवाद के बाद अब जिला प्रशासन ने मामले में औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी है। जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने गढ़वाल राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर को पत्र भेजकर बदरीनाथ धाम में आयोजित कार्यक्रम को लेकर जवाब मांगा है। पत्र में कार्यक्रम की अनुमति, साउंड सिस्टम के इस्तेमाल और आयोजन की परिस्थितियों को लेकर जानकारी मांगी गई है। जिलाधिकारी की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि विभिन्न संचार माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए बदरीनाथ धाम में बड़े स्तर पर कल्चरल फेस्टिवल आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भीड़ एकत्रित होने और उद्घाटन के दौरान साउंड सिस्टम के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है।

पत्र में बदरीनाथ धाम को धार्मिक आस्था का केंद्र बताते हुए कहा गया है कि पवित्र स्थान की गरिमा सर्वोच्च है। प्रशासन ने धार्मिक आयोजनों और पूजा-अर्चना के कार्यक्रमों पर इस तरह के आयोजन के प्रतिकूल प्रभाव की आशंका भी जताई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस प्रकार के आयोजन से धार्मिक भावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के साथ स्थानीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया उत्पन्न हो सकती है। सबसे अहम बात यह है कि डीएम ने गढ़वाल राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर से स्पष्ट रूप से पूछा है कि बदरीनाथ धाम में कल्चरल प्रोग्राम आयोजित करने के संबंध में सक्षम स्तर से कोई अनुमति प्राप्त की गई थी या नहीं और कार्यक्रम में साउंड सिस्टम का प्रयोग किन कारणों से किया गया।

प्रशासन ने इस संबंध में तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही पत्र में यह भी निर्देशित किया गया है कि इस प्रकार के कार्यक्रम की पुनरावृत्ति बदरीनाथ धाम में न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब बदरीनाथ धाम में ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थीम के तहत हुए सांस्कृतिक आयोजन को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। आयोजन में तेज संगीत, साउंड सिस्टम और मंचीय कार्यक्रम को लेकर धार्मिक परंपराओं तथा धाम की गरिमा का हवाला देते हुए आपत्तियां सामने आई थीं। खास तौर पर यह तथ्य चर्चा में रहा कि बदरीनाथ धाम में धार्मिक परंपराओं के तहत शंखनाद तक से परहेज किया जाता है, ऐसे में बड़े साउंड सिस्टम वाले कार्यक्रम को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक था।


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